झोली में मरीज को ले जाते हैं अस्पताल
प्रसिद्धपर्यटन नगरी मांडू के समीप खाई पहाड़ियों के बीच बसी दो ग्राम पंचायतें मालीपुरा पिपल्यादिया। आबादी आठ हजार से ज्यादा। स्वास्थ्य सुविधा सिर्फ नाम की। अगर मरीज को अस्पताल तक ले जाना हो तो ग्रामीण लकड़ी पर कपड़ा बांधकर बनाते हैं झोली और उसमें मरीज को डालकर चार किमी घाट चढ़कर पहुंचते हैं कमानी दरवाजे तक। यहां वाहन की व्यवस्था कर जैसे-तैसे अन्यत्र अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से कई बार गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
सोमवार को भी आंबापुरा के आदिवासी हगरिया पिता नगजी का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। परिजनों ने उन्हें लकड़ी-कपड़े की झोली में डाला और चार किमी का घाट चढ़कर पहुंचे कमानी दरवाजे तक। यहां वाहन की व्यवस्था की और अस्पताल रवाना हुए। ग्रामीणों का कहना है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सरकार 500 की आबादी वाले मजरों तक भी सड़क बनवा रही है, लेकिन इन दो ग्राम पंचायतों को सड़क मार्ग से नहीं जोड़ा गया। कमानी दरवाजे तक का रास्ता भी घाटनुमा है। सड़क के नाम पर बड़े-बड़े पत्थर हैं। वहां चार पहिया वाहन चलते हैं और दुपहिया।
मामले को दिखवाती हूं
^500से ज्यादा आबादी वाले गांव सड़क से जोड़े जा रहे हैं। खाई में होने के कारण हो सकता है कि कोई तकनीकी परेशानी हो। अफसरों से चर्चा कर दिखवाती हूं। मांडू अस्पताल भवन का लोकार्पण नहीं हुआ है लेकिन सामान शिफ्ट कर दिया है। -जयश्री कियावत, कलेक्टर
और इधर...मांडू अस्पताल में भी मरीजों को खतरा
अगर ग्रामीण मरीज को मांडू के सरकारी अस्पताल तक ले भी आए तो उसका इलाज नहीं हो पाएगा। यहां पुराने अस्पताल भवन की छत से गिरते प्लास्टर टपकते पानी से बचाने के लिए कपड़ा बांध रखा है। हालांकि नया भवन बन चुका है, लेकिन विधायक डॉक्टर के बीच हुए विवाद के कारण मामला ठंडा पड़ गया।
बीमार ग्रामीण को झोली में भरकर अस्पताल ले जाते गांववाले।
यूं पार करते हैं 4 किमी का घाट