पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सरकार बना और गिरा सकता है सोशल मीडिया

सरकार बना और गिरा सकता है सोशल मीडिया

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मंगलवार कीसुबह देशभर की नजर दिल्ली चुनाव के नतीजाें पर लगी थी। हरेक ट्विटरेटी अपनी राय सार्वजनिक करने में लगा था चाहे वह किसी के पक्ष में हो या विरोध में। दिल्ली में भाजपा की मुख्यमंत्री उम्मीदवार किरण बेदी के ट्वीट के पहले राणा अयूब ने ट्वीट किया : कांग्रेचुलेशंस केजरीवाल। यह जीत आपको भाजपा के रास्ते पर ले जाए। विनम्रता बनी रहे और ये समझें कि वोटर तो आपके साथ ही है। सोशल मीडिया का ये पोस्ट हर किसी से और किरण बेदी से जो इसे फॉलो कर रही हैं उनसे क्या कहता है?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी को छोड़कर किसी ने भी इस महत्वपूर्ण एंगल को ध्यान में नहीं रखा और इसी ने उसको ऐतिहासिक जीत दिलाई।

नवंबर 2014 में आईआईटी मुंबई के दस उत्साही वालंटियर्स के एक ग्रुप ने हजारों पोस्ट्स की पड़ताल कर आम राय को जानने के खास मकसद से रिसर्च टूल बनाया। इसने दिल्ली के चुनाव के लिए आप को चुनावी रणनीति बनाने में खासी मदद की। छात्रों ने इस तरह से कार्यक्रम डिजाइन किया जिससे सोशल मीडिया के पोस्ट्स में आम आदमी का भावनात्मक विश्लेषण किया जाए।

इस टूल को बनाने वाले इंजीनियरिंग फिजिक्स के तीन या चार छात्र वालंटियर्स ने इन सभी ट्विटर हैंडल्स की स्कैनिंग करनी शुरू कर दी और इसके नतीजों के बारे में आप को बताया जिससे वह अपनी चुनावी रणनीति को सुधार कर और बेहतर कर सके।इसने आप के चुनाव अभियान को उन मुद्दों से दूर रखने में मदद की जिनको मतदाताओं ने नकारात्मक माना था। वहीं फीडबैक के आधार पर जनभावनाओं से जुड़े महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता पर गए। इस टूल की मदद से अलग-अलग मुद्दों को लेकर लोगों के फीडबैक का आकलन किया गया। ज्यादातर इनपुट इसी टूल और इसके विश्लेषण से मिला। किसी समय में आप के प्रति वोटर के सेंटीमेंट्स के बदलते रुझान को देखा गया।

इसके कारण ही पार्टी की रणनीति ऐसी रही कि जब दूसरी पार्टियां विरोधी पर नकारात्मक हमले कर रही थीं उस समय आप वोटर को खुश करने का रास्ता अपना रही थी। जैसे कि पूरी दिल्ली को वाईफाई करना जो कि एक ऐसी आबादी के लिए बहुत मामूली सा लगता है जो कि मजबूत राय रखने वाली मानी जाती है। वाईफाई जैसा चुनावी वादा युवा आबादी से मिले फीडबैक के आधार पर ही किया गया। पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं से मिली राय पर इसे चुनाव घोषणा-पत्र में रखा गया।

सोशल मीडिया के भावनात्मक विश्लेषण से युवा और महिला मतदाताओें की खास मांगों को समझने में मदद मिली। युवा विकास होने और नकारात्मक शब्दों, एक दूसरे पर कीचड़ उछाले जाने, आरोपों से नाखुश थे। वे यह जानना चाहते थे कि सरकार उनके लिए क्या करेगी। बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां इसमें पीछे रह गईं।

यह प्रोग्राम हजारों ट्विटर हैंडल्स के डाटाबेस का विश्लेषण करता है और किसी खास इवेंट या मुद्दे पर लोगों की राय को पांच वर्गों में बांटता है - 1. निगेटिव 2. वीकली निगेटिव 3. न्यूट्रल 4. वीकली पॉजिटिव और 5 . पॉजिटिव।

फंडा यह है कि

नईसोच या नई दृष्टि लाने में सोशल मीडिया बहुत महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया के माध्यम से देश के युवा मतदाताओं ने एक लाइन में साफ संदेश दिया है - नकारात्मकता आपको नीचे ले जाएगी और सकारात्मकता आपको ऊपर ले जाएगी। इसी सोच को समाने रखकर दैनिक भास्कर पहला अखबार बना है जिसने सोमवार को पॉजिटिव न्यूज जैसी पहल की है।

raghu@dainikbhaskargroup.com