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चिटफंड कंपनियों की बनी रिपोर्ट, जमीन के नाम पर कागजों पर करा रहे निवेश

7 वर्ष पहले
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शहरमें चिटफंड कंपनियां अलग-अलग तरह के लुभावने ऑफर देकर निवेशकों को ठगने का काम कर रही हैं। जिला प्रशासन ने दो साल में मिली चिटफंड कंपनियों की शिकायतों के आधार पर रिपोर्ट बनाई है, जिसमें सामने आया है कि कोई कपड़ा बेचने के नाम पर तो कोई जमीन में निवेश करने के नाम पर निवेशकों को ठग रहा है। कुछ मामलों में कोर्ट में परिवाद भी पेश हुए हैं। प्रशासन ने इन कंपनियों के खिलाफ मुहिम तेज करते हुए एक सप्ताह में पांच से अधिक कंपनियों के यहां छापे की कार्र‌वाई की है। शिकायतकर्ता के अभाव में प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई में तेजी नहीं रही है। दोनों विभाग शिकायतकर्ताओं का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इनके खिलाफ एफआईआर की जा सके।

इन कंपनियों के खिलाफ यह है रिपोर्ट में

मेसर्स जी लाइफ- निवेशकोंसे जमीन में निवेश के नाम पर राशि ली गई, लेकिन कंपनी के पास जमीन नहीं है और ही किसी तरह का कॉलोनाइजर लाइसेंस है। परिवाद पेश किया है।

रोजवेलीहोटल एंड एंटरटेनमेंट- कंपनीऑफर दे रही है कि 1500 रुपए प्रतिमाह पांच साल तक निवेश करने पर सदस्य को हॉलिडे मेंबरशिप दी जाएगी, इससे वह किसी भी होटल में छुट्टियां बिता सकेगा। प्रशासन ने बैंक खातों पर रोक लगा दी है।

ट्यूलिपग्लोबल- कंपनी220 रुपए का कपड़ा बाजार में 3500 रुपए में सदस्य बनाकर बेचती है। इसमें एजेंट को भारी कमीशन दिया जाता है। परिवाद पेश किया गया है।

मेसर्सपेनजॉन- प्रकरणविशेष न्यायालय में विचारणीय।

मेसर्स मदरानी डेवलपर्स- भूखंडों के नाम पर निवेशकों से निवेश कराया, लेकिन कोई जमीन नहीं। इसके साथ ही प्रशासन ने इंडस वियर, सांईप्रसाद फूड्स, बीएनजी गोल्ड, सिनकॉम हेल्थकेयर, रियल लाइफ, यूनिबिज, आरोग्य कंपनियों के यहां भी जांच अन्य कार्रवाई की है।