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आंबी के खेत में दिखा आदमखोर तेंदुआ

7 वर्ष पहले
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सातलोगों की जान ले चुका आदमखोर तेंदुआ सोमवार को ग्राम आंबी के खेत में नजर आया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्चिंग की पर तेंदुआ हाथ नहीं आया। दोपहर 1 बजे ग्राम आंबी के एक खेत में साेमजी भुवान कालिया केरू चारा काट रहे थे। तभी उन्हें एक खेत के बीच बबूल के पेड़ के नीचे तेंदुआ नजर आया। उसे देख दोनों गांव की ओर भागे। उन्होंने पूर्व सरपंच भंगडिया के पुत्र केरमसिंह को जानकारी दी। केरमसिंह ने ग्रामीणों डीएफओ आरएस सिकरवार को तेंदुआ दिखाई देने की बात बताई। ग्रामीण वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा लेकिन तेंदुआ कहीं नजर नहीं आया। आसपास के खेतों में टीम ने सर्चिंग कर ही रही थी कि बापू गुमानसिंह ने भी खेत में काम करते समय तेंदुए की गुर्राहट सुनने की बात कही।

सोमवार को धार से रेंजर डीएस मेड़ा तीसरा पिंजरा लेकर किलाना पहुंचे। जिस वाहन में पिंजरा रखा था वह करीब दो घंटे तक कीचड़ में फंसा रहा। वन विभाग के कर्मचारियों ने जैसे-तैसे वाहन को कीचड़ से निकाला। इसके बाद पिंजरे को किलाना क्षेत्र की सियाली बीट के 422 कम्पार्टमेंट में लगाया गया। शेष दो कैमरे मंगलवार को तैयार होकर आएंगे। लॉकर सिस्टम नहीं बनने के कारण पिंजरे नहीं लाए जा सके। एसडीओ रमेशचंद्र राठौर, रेंजर श्रीराम राठौर भाबरा, डीएस मेड़ा रेंजर जोबट, पीसी मकवाना डिप्टी रेंजर उदयगढ़, वन पाल आरएस तिवारी, एएसएल भूरिया, आरक्षक सरफराज मकरानी, भूरसिंह चौहान, समरथ चौहान, मोहब्बतसिंह बघेल, गणपतसिंह नायक, खलील खान भी टीम के साथ हैं।

तीसरा पिंजरा लेकर आया वाहन कीचड़ में फंसा

खेत में तेंदुए की सर्चिंग करती टीम।