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बिहार की कथित एनजीओ ने 1400 रुपए लेकर युवकों को नौकरी पर रख करवाई ठगी

7 वर्ष पहले
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श्योपुर | दोसौ रुपए रजिस्ट्रेशन फीस और 1200 रुपए बीमा शुल्क वसूलकर बिहार की एक एनजीओ ने जिले में आधा सैकड़ा से अधिक कर्मचारी बना दिए। इसके बाद इन्हीं कर्मचारियों के जरिए गांव-गांव में ग्रीनकार्ड बनाने के नाम पर ग्रामीणों से भी उगाही शुरू करा दी। इसके बाद पैसा देने के बाद भी वेतन और ग्रीनकार्ड बनाने पर एनजीओ के कथित कर्मचारियों ने सोमवार को कलेक्टर धनंजय सिंह भदौरिया कोतवाली टीआई एचएस रावत से शिकायत की।





पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बिहार की एक एनजीओ अल फातिमा ह्यूमन रिसोर्सेस सोसायटी ने जिले में ग्रामीणों को ग्रीनकार्ड बनाकर देने के लिए एक योजना शुरू कराने का झांसा दिया है। इसके पैम्पलेट में 15 बिंदुओं में साफतौर पर यह दर्शाया गया है कि ग्रीनकार्डधारक महज 40 रुपए देकर सदस्य बन सकेगा और कार्डधारक को 30 प्रतिशत तक खरीदारी में छूट दी जाएगी। पैम्पलेट में बताया गया है कि सिर्फ ग्रीन कार्डधारकों को राशन आदि पर छूट मिलेगी, बल्कि हर तरह की ट्रेनिंग, अस्पताल के खर्च आदि में भी उन्हें रियायत दी जाएगी।

इन लुभावने वादों के सहारे एनजीओ ने अब तक करीब एक हजार लोगों को झांसे में लेकर हजारों रुपए की अवैध उगाही की है। इसके लिए एनजीओ ने 50 ग्राम पंचायतों में अपने वर्कर तैनात किए हैं। इन युवकों को एनजीओ 7 हजार महीने वेतन देने का वादा भी किया, लेकिन करीब डेढ़ माह काम करने के बाद भी तो इन कर्मचारियों को वेतन मिला है और ही ग्रामीणों को ग्रीनकार्ड। इसके बाद ग्रामीणों ने ठगी की शिकायत की।





सोमवार को इस मामले में एनजीओ के खिलाफ ठगे गए युवकों अमित चौहान, प्रतीक सिसौदिया, रजत गोयल, विकास मीणा, मनमोहन सिंह, सोनू शर्मा, पुनीत मंगल, सोनू चौहान, अनुराग सिंह, जितेंद्र सिंह, राहुल जादौन, बृजराज तोमर ने मोर्चा खोल दिया। एक राय होकर सभी युवक पहले तो कलेक्टर धनंजय सिंह भदौरिया के पास गए।

कलेक्टर ने पूरा माजरा समझने के बाद शिकायतकर्ताओं को बताया कि इस तरह की कोई योजना नहीं है। इसलिए आप लोग सीधे सिटी कोतवाली में जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इसके बाद शिकायतकर्ता सीधे कोतवाली टीआई एच एस रावत के पास आए। टीआई ने शिकायतकर्ताओं की बात सुनी और पैम्पलेट आदि देखने के बाद जांच शुरू करने की बात कही।

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