मौली के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई
बाग | गांवमें लकड़ी की मौली (भारे) रोजाना सौ से सवा सौ की तादात में आते हैं। रात दो बजे से ग्रामीण क्षेत्रों से सिर पर, बाइक और साइकिल पर लाद कर ये भारे लाए जाते हैं। रोजाना तीन से चार टन वजन में होटल व्यापारी, कपड़ा प्रिंट, घर उपयोग में, शासकीय आश्रम, होस्टल, एमडीएम खाना बनाने वाले आदि लोग खरीदी करते हैं। एक लक्कड़हारे ने नाम नहीं छपने के अनुरोध पर बताया विभाग की मदद के हम वन में घुस भी नहीं सकते। इतनी लकडिय़ां काटना और सुखाना अचानक नहीं होता। ऐसे में करोड़ों रुपए लगाकर किए जा रहे पौधारोपण और योजनाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रेंजर पाठक का कहना है हमने जब से चार्ज लिया, तब से इस तरह के केस कम हो गए हैं।
बाग. गांव में रोज सुबह चलता लकड़ी की मौली का मोलभाव।