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खून की उल्टियां करती रही बच्ची, अधीक्षिका ने दरवाजा भी नहीं खोला, मौत

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | धार. यहांके छात्रावास में अधीक्षिका की लापरवाही से कक्षा दूसरी की छात्रा (7) की मौत हो गई। वह छह दिन से बीमार थी, लेकिन उसका इलाज नहीं कराया गया। सोमवार देर रात छात्रा को खून की उल्टियां होने लगी, पर छात्रावास अधीक्षिका ने अपने कमरे का दरवाजा तक नहीं खोला। मंगलवार सुबह 10 बजे उसे अस्पताल पहुंचाया जहां से उसे इंदौर ले जाया गया। इलाज के दौरान शाम चार बजे छात्रा ने दम तोड़ दिया।

घटना कलेक्टर बंगले के पीछे अंग्रेजी माध्यम छात्रावास की है। यहां रह कर दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली किकरवास (निसरपुर) की प्रवीणा काशीराम कवचे छह दिनों से बीमार थी। शेष-पेज 4 पर

छात्रावासकी अन्य छात्राओं ने बताया रात डेढ़ बजे प्रवीणा को खून की उल्टी हुई। तभी अधीक्षिका रश्मि तिवारी के स्टाफ क्वार्टर का दरवाजा बजाया लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। बाद में फिर उल्टियां हुई लेकिन इलाज के लिए अस्पताल नहीं भेजा जा सका। सुबह 10 बजे बच्ची को जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बताया कि मस्तिष्क ज्वर है, इंदौर ले जाना पड़ेगा। गंभीरावस्था का पता लगने के बाद आदिवासी विकास विभाग को सूचना दी गई। सहायक आयुक्त ने गाड़ी से बच्ची को इंदौर भेजा, जहां इलाज के दौरान शाम 4 बजे बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद सहायक आयुक्त ने अधीक्षिका को तत्काल छात्रावास से हटा दिया। सेवा समाप्ति का शोकॉज नोटिस भी जारी कर दिया है।



^मामले में अधीक्षिका की स्पष्ट लापरवाही है। उन्हें तत्काल छात्रावास से हटा दिया है। सेवा समाप्ति के लिए शोकॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। -नीलेश रघुवंशी, सहायकआयुक्त आदिवासी विकास विभाग धार

^मामला बेहद गंभीर है। सहायक आयुक्त को जांच के लिए कहा है। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। -जयश्री कियावत, कलेक्टरधार

^दरवाजा नहीं खोलने का आरोप निराधार है। मैंने रात में ही बच्ची को गोली दी थी। सुबह उसके अंकल के सुपुर्द भी कर दिया था। -रश्मितिवारी, छात्रावासअधीक्षिका

प्रवीणा

साथी छात्राएं धरने पर बैठीं, लगाया गेट

बालिकाकी मौत के बाद परिसर के सारे होस्टल की छात्राएं रात 8 बजे धरने पर बैठ गईं और अधीक्षिका के खिलाफ नारेबाजी की। मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। कहने लगी अधीक्षिका को नहीं आने देंगे। तहसीलदार, बीईओ प्राचार्य ने कहा कि अधीक्षिका को हटा दिया है लेकिन छात्राएं लिखित में यह मांग रही