पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • 10 फीसदी (करीब) जीडीपीका निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर में करने का लक्ष्य है 12वीं पंचवर्षीय योजना में। 11वी

10 फीसदी (करीब) जीडीपीका निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर में करने का लक्ष्य है 12वीं पंचवर्षीय योजना में। 11वीं योजना में यह 7.6 फीसदी था।

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
82-86 फीसदी तककमी है ट्रेंड प्रोफेशनल्स की इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में। 2020 तक देश में करीब 4 लाख आर्किटेक्ट और 1 लाख से ज्यादा प्लानिंग प्रोफेशनल्स की भी जरूरत होगी।



17 साल में बढ़ी केवल 10 हजार सीटें, इसलिए कम हो गए सिविल इंजीनियर

1990में देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग की 13,500 सीटें थीं जबकि कंप्यूटर साइंस और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को मिलाकर 12,100 सीटें थीं। अगले पंद्रह सालों में देश की सॉफ्टवेयर और आईटी इंडस्ट्री का तेजी से विकास हुआ जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई। वर्ष 2007 के अंत में कंप्यूटर साइंस और आईटी में सीटों की संख्या बढ़कर 1 लाख 93 हजार 500 हो गईं लेकिन सिविल इंजीनियरिंग की सीटें केवल 22,700 थीं। देशभर के 16 आईआईटी संस्थानों और आईएसएम, धनबाद में अंडरग्रेजुएट कोर्स में कुल मिलाकर करीब 10 हजार सीटें हैं, लेकिन सिविल इंजीनियरिंग की सीटें 10 फीसदी से भी कम हैं।

सरकारीऔर निजी क्षेत्र में हैं नौकरी के अवसर

इंजीनियरिंगकी सभी स्ट्रीम्स में सिविल इंजीनियरिंग का कार्यक्षेत्र सबसे विस्तृत है। प्रोजेक्ट्स की डिजाइन, प्लानिंग, कंस्ट्रक्शन, सुपरविजन और क्वालिटी कंट्रोल के अलावा मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सिविल इंजीनियर की होती है। उनके लिए नौकरी के अवसर सरकारी और निजी क्षेत्रों में मौजूद हैं। सरकारी क्षेत्र में पब्लिक वर्क्स, इरीगेशन, पब्लिक हेल्थ, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अन्य विभागों में उन्हें नियुक्त किया जाता है। निजी क्षेत्र में रियल इस्टेट, रोड और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट, क्वालिटी टेस्टिंग लेबोरेटरी, कंसल्टेंसी कंपनियों में भी उनके लिए रोजगार के अवसर हैं। इसके अलावा शिक्षण तथा रिसर्च संस्थानों में भी वे काम कर सकते हैं।

10+2के बाद ले सकते हैं एंट्री, शीर्ष संस्थानों में हर सीट के लिए 100 से ज्यादा उम्मीदवार

सिविलइंजीनियरिंग में कॅरिअर बनाने वाले छात्र फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ 10+2 करने के बाद इसके यूजी कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में जेईई-मेन या अन्य एंट्रेंस एग्जाम्स के जरिये प्रवेश मिलता है। अाईआईटी संस्थानों में सिविल इंजीनियरिंग की कुल 891 सीटें हैं। इनमें जेईई-एडवांस के आधार पर प्रवेश मिलता है। हर साल करीब डेढ़ लाख छात्र एडवांस परीक्षा में शामिल होते हैं।