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प्रत्याशियों के चयन के बाद ही जमेगा चुनावी रंग बिनाकिसी परिवर्तन के सभी पुराने परिसीमन के आधार पर ही होने हैं नगरीय निकाय चुनाव

7 वर्ष पहले
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नगरीयनिकाय चुनाव को लेकर अब सभी की निगाहें प्रत्याशी चयन में लगी हुई हैं। अभी तक किसी भी दल ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि टिकट के लिए सभी राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर संभावित दावेदार पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं। हर दावेदार टिकट के सपने देख रहा है। इसके लिए अपने आकाओं की परिक्रमा करने में वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि कोरिया जिले के अंतर्गत आने वाले नगर निगम चिरमिरी में 29 दिसंबर को महापौर समेत 40 वार्ड पार्षदों के लिए मतदान होगा। इसके एक दिन बाद 31 दिसंबर को नगर पालिका परिषद् मनेन्द्रगढ़ के अध्यक्ष तथा 22 वार्डो के पार्षदों के साथ ही नगर पंचायत खोंगापानी अध्यक्ष तथा 15 पार्षद, नगर पंचायत झगराखाण्ड तथा 15 पार्षद तथा नगर पंचायत नई लेदरी अध्यक्ष के साथ ही 15 पार्षदों के लिए मतदान होगा। प्रदेश की तरह पहली बार यहां भी नगरीय निकाय चुनाव में ईवीएम मशीन का उपयोग किया जाना है। इससे पहले नए ढंग से परिसीमन किए जाने के आदेश और इस दिशा में शुरू की गई कार्रवाई ने संभावित दावेदारों में नई उम्मीद जगाई थी। पर इस पर पानी फिर गया क्योंकि बिना किसी परिवर्तन के सभी क्षेत्रों में पुराने परिसीमन के आधार पर ही नगरीय निकाय के चुनाव कराए जा रहे हैं।

डोर-टू-डोर प्रचार

नगरीयनिकाय चुनाव में डोर-टू-डोर प्रचार अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि जिन उमीदवारों को पार्टी द्वारा लगभग टिकट के लिए हरी झंडी मिल गई है वे लोगों से मेल जोल बढ़ाने में लगे हुए हैं। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने तो अपना प्रचार पहले से ही शुरू कर रखा है क्योंकि उन्हें तो टिकट की चिंता है और अपने आकाओं के इशारे की। यही वजह है कि इन नगरीय निकाय चुनाव में निर्दलीय भी पूरे जोर शोर से राजनीतिक समीकरण फिट करने में लगे हुए हैं। हालांकि सभी क्षेत्रों में चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हैं पर सभी स्थानों का समीकरण अपना अलग अलग तरीके का है।

खर्च की सीमा से पार्षद मुक्त हैं

नगरीयनिकाय चुनाव में निर्वाचन आयोग ने महापौर अध्यक्ष पद के दावेदारों के लिएे खर्च की सीमा तय की है पर पार्षदों को इससे मुक्त रखा है। अब इन प्रत्याशियों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि चुनाव लड़ने के लिए भरपूर राशि खर्च कर सकेंगे। मतदाताओं को लुभाने का भी प्रयास होगा। ऐसी स्थिति में पार्षद पद के उम्मीदवार अपना खजाना ख