21 लाख किसानों को फसल बीमा अगले माह
प्रदेश के 21 लाख से अधिक किसानों को फसल बीमा की 4293 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जाएगी। खरीफ सीजन 2015 में अतिवर्षा व कीट व्याधि से खराब हुई सोयाबीन सहित अन्य फसलों का राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति राशि जिलेवार मंजूर हो गई है। प्रभावित फसलों की क्षतिपूर्ति के तौर पर किसानों को मार्च-अप्रैल में यह राशि ई-पेमेंट के जरिए उनके खाते में भुगतान की जाएगी। इसके लिए संबंधित किसानों के खातों की जांच कराई जा रही है कि वह चालू है या नहीं, ताकि राशि का भुगतान किया जा सके। यह पहला मौका है जब देश में सबसे अधिक फसल बीमा की राशि मध्य प्रदेश में बांटी जाएगी।
कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजाैरा ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए 28 लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया था। योजना के तहत इन किसानों ने बतौर प्रीमियम राशि 350 करोड़ रुपए जमा की थी। फसल खराब होने पर सर्वे किया गया था जिसमें 21 लाख 50 हजार किसान बीमा राशि के लिए पात्र पाए गए थे। जिन्हें 4293 करोड़ रुपए वितरित किए जाएंगे। इसमें राज्य और केंद्र का अंश 2-2 हजार करोड़ रुपए है। राज्य सरकार ने इस मद में 1800 करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान कर दिया था। शेष 200 करोड़ रुपए चतुर्थ अनुपूरक में मांगे गए हैं। डॉ. राजौरा के मुताबिक अगले दो माह में यह राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
सबसे ज्यादा बीमा पाने वाले जिले
जिले स्वीकृत राशि
देवास 438.91
सिहोर 382.85
उज्जैन 331.10
विदिशा 284.87
सागर 247.53
(राशि: करोड़ रुपए में)
‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
पर लग सकती है मुहर’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 फरवरी को सीहोर जिले में शेरपुर गांव में आयोजित किसान सम्मेलन में आएंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को समर्पित करेंगे। यह योजना अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने योजना लागू की थी, लेकिन अब न्यूनतम प्रीमियम के आधार पर अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी और विस्तृत स्वरूप दिया गया है। इसमें बुआई से लेकर किसान के घर तक फसल पहुंचने में होने वाली क्षति की भरपाई होगी। यदि प्राकृतिक आपदा के कारण किसान बोवनी नहीं कर पाया तो भी वह दावा कर सकता है। क्षति का आकलन होने पर किसान को तत्काल 25 फीसदी राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। शेष राशि समूचे आकलन के बाद भुगतान की जाएगी। क्षति का आकलन रिमोट सेंसिंग से किया जाएगा।