छोटे बच्चे जब बोलन
थाइलैंड में आम लोग बोलचाल के लिए थाई भाषा का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन राजा या राजपरिवार के बारे में कोई भी बात बोलने के लिए उन्हें अलग भाषा का उपयोग करना होता है। रचासप नाम की यह भाषा करीब 700 साल पहले बनाई गई थी। इसे थाई के अलावा खमेर भाषा के शब्दों को मिलाकर बनाया गया है, लेकिन यह आम बोलचाल की भाषा से काफी अलग है। इसमें उपसर्ग और प्रत्यय का ज्यादा उपयोग होता है। इसे सीखना काफी मुश्किल है। स्थानीय लोग भी इसे समझ जाते हैं, लेकिन अधिकतर बोल नहीं पाते। हालांकि, मीडिया और सार्वजनिक घोषणाओं में राजा
छोटे बच्चे जब बोलना शुरू करते हैं, तो उनका लहजा वही होता है, जो वे सबसे ज्यादा सुनते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार बोलने की क्षमता से पहले ही एक्सेंट का विकास हो जाता है। जर्मनी के वुर्जबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार नवजात बच्चे रोते हुए भी वही स्पीच पैटर्न इस्तेमाल करते हैं, जो वे सुनते हैं। आम तौर पर यह उनके पैरेंट्स के लहजे से मिलता-जुलता है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसीलिए फ्रांस में छोटे बच्चे जब रोते हैं तो आखिर में उनकी आवाज तेज हो जाती है जबकि जर्मन बच्चे इसका उल्टा करते हैं। जन्म के तीन दिन बाद ही बच्चों के बोलने का लहजा विकसित होने लगता है। शोध के मुताबिक बच्चा सबसे पहले अपनी मां के लहजे की नकल करने की कोशिश करता है, ताकि वो उसके नजदीक आ सके।
कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, त्रिवेंद्रम
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून
वामनीकॉम, पुणे
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलोर
बीआईटी, मेसरा
थाइलैंड में राजपरिवार के लिए होता है अलग भाषा का इस्तेमाल
जन्म के तीन दिन बाद ही विकसित होने लगता है बच्चे का एक्सेंट