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हाजी अली ट्रस्ट, महिलाओं के दरगाह पर प्रवेश से प्रतिबंध नहीं लगा सकता

5 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज नेटवर्क | मुंबई

मशहूर हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश देने की मांग वाली याचिका पर हुई सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं का समर्थन किया है। मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकारी वकील ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ट्रस्ट, दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता, क्योंकि देश के नागरिक का मौलिक अधिकार रीति-रिवाज से ऊपर है।

इसके विपरीत हाजी अली दरगाह ट्रस्ट का कहना है कि सभी ट्रस्टों को अपने धार्मिक कार्य करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। इसमें संविधान की धारा 26 के अनुसार कोई भी बाहरी व्यक्ति या संस्था हस्तक्षेप नहीं कर सकते। दरगाह ट्रस्ट ने 2012 से महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। जिसके खिलाफ भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की नूरजहां शफिया नियाज और जकिया सोमन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की हुई है। सुनवाई के दौरान 3 फरवरी को हाईकोर्ट ने संकेत दिया था कि वह इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केरल के सबरीमला मंदिर प्रकरण में फैसला आने के बाद ही सुनाएगा। जज वीएम कानडे और रेवती मोहिते डेर की खंडपीठ ने राज्य के महाधिवक्ता श्रीहरि अणे को सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

याचिका दाखिल करने वाली मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी संविधान द्वारा देश के नागरिकों को दिए गए मूलभूत अधिकारों का हनन है। इन्होंने दलील दी कि जब माहिम की मशहूर दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक नहीं है, तो हाजी अली में प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?

अधिकारों का हनन
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