मिस्टर मैरी कॉम कैसे बनें!
पिछले हफ्तेमैंने अद्भुत फिल्म मैरी कॉम देखी। चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम की जिंदगी पर आधारित फिल्म। तकनीकी पहलू से तो यह बेहतर फिल्म है ही पर इसके अलावा प्रियंका चोपड़ा की प्रमुख भूमिका वाली इस मूवी में कई बातें अच्छी हंै, जिसमें सभी ने उम्दा काम किया है। मैरी कॉम की जीवन यात्रा पटकथा के लिए शानदार सामग्री थी और फिल्म की पूरी टीम ने इस प्रेरक कथा को परदे पर साकार करने के लिए आला दर्जे का काम किया है। दिलचस्प बात यह है कि अशली जिंदगी में मैरी कॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो बॉक्सिंग रिंग के बाहर थी। चेहरे पर बरसने वाले मुक्के नहीं बल्कि पसंद के कॅरिअर के लिए पालकों को राजी करना, शादी, गर्भावस्था, और मातृत्व ये बातें मैरी कॉम के लिए ज्यादा कठिन थीं। सामान्य जीवन की ये वे चुनौतियां हैं, जो किसी भई महिला के लिए अपने सपने को साकार करना बहुत कठिन बना देती हैं। उन्होंने इन सब चुनौतियों को मात दी और जीत हासिल की, यही बात उन्हें आइकन बनाती है।
हालांकि, कहानी में एक और सितारा है। यह है मैरी कॉम के पति ऑनलर कॉम (अभिनेता दर्शन कुमार ने फिल्म में उम्दा तरीके से यह भूमिका निभाई है), जो हर वक्त अपनी प|ी के सबसे जबर्दस्त समर्थक बने रहे। बॉक्सिंग रिंग पर मैरी कॉम का उत्साह बढ़ाने से लेकर घर पर बच्चों के लंगोट बदलने की भूमिका निभाने तक ऑनलर ने मैरी कॉम के सपने को मरने नहीं दिया। उन्होनंे अपना कॅरियर पृष्ठभमि में डाल दिया, प|ी को प्रैक्टिस के लिए भेजकर घर पर बच्चों को बखूभी संभाला। एेसे में अचरज नहीं कि मैरी कॉम ने ही नहीं, उनके पति ने भी दर्शकों का दिल जीता। दर्शकों में कई लड़कियां रश्क करती पाई गईं कि ‘क्या अद्भुत पति है!’ (सिनेमा हॉल सामूहिक रूप से आहें भरने की आवाजों से गूंज उठा।)
हर किसी को ऑनलर के प्रेम में पड़ते, उनकी सराहना करते देख मैं सोच में पड़ गया। मिस्टर मैरी कॉम तो महान हैं, लेकिन क्या लाखों भारतीय महिलाएं अपने पति के लिए रोज यही सब नहीं करतीं? यदि यही फिल्म किसी पुरुष बॉक्सर पर होती, जिसमें उसकी प|ी का पूरा सहयोग होता। वह घर पर बच्चों की देखभाल करती तो क्या हम उसकी इतनी सराहना करतें, इतनी आहें भरते? क्या हम ऐसे दंपतियों से वाकिफ नहीं हंै, जहां प|ियां इसलिए पीछे हट गईं कि पति कॅरिअर में अच्छा प्रदर्शन कर सकंे? ऐसा क्यों है कि किचन में काम करने वाले और बच्चों की देख