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बांग्लादेश में कट्टरपंथी नेता की फांसी उम्रकैद में बदली
बांग्लादेशकी शीर्ष कोर्ट ने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के नेता दिलवार हुसैन सईदी की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया है। लेकिन सईदी को सारी उम्र जेल में रहना पड़ेगा।
चीफ जस्टिस एम. मुजम्मिल हुसैन ने खचाखच भरी अदालत में यह हैरान करने वाला फैसला सुनाया। सईदी को देशद्रोह का दोषी ठहराया गया था। उसने 1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के समय पाकिस्तान का साथ दिया था। उसने पाकिस्तानी सेना का साथ देने के लिए अल-बद्र-अल-शम्स जैसे मिलिशिया गुट की शुरूआत की थी। हुसैन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच ने बहुमत के आधार पर फैसला बदला। लेकिन कितने जजों की राय अलग थी यह नहीं बताया गया। सईदी को पिछले साल फरवरी में विशेष ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई थी। उसके बाद देश में घातक राजनीतिक हिंसा फैल गई थी।
ट्रिब्यूनल ने सईदी को छह प्रमुख आरोपों का गुनहगार माना। लेकिन शीर्ष अदालत ने उसे नरसंहार के आरोपों से बरी कर दिया। अलबत्ता कई हत्याएं, दुष्कर्म और कई हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाने के आरोपों का दोषी माना। अटार्नी जनरल महबूबे आलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला निराशाजनक है। उन्हें उम्मीद थी कि शीर्ष काेर्ट भी ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखेगी।