याहू के लिए मेरिसा मायर का नया दांव
याहू कीसीईओ मेरिसा मायर ने 27 जनवरी को अलीबाबा ग्रुप में कंपनी की 2419 अरब रुपए की हिस्सेदारी बेचने की योजना का खुलासा किया है। इस फैसले से उन्हें कंपनी को मुश्किल से उबारने के लिए समय मिल जाएगा। वैसे, मायर के कंपनी की कमान संभालने के बाद से शेयरहोल्डर ऐसी मांग करते रहे हैं।
शोहरतका शिखर : मायरगूगल के पहले 25 कर्मचारियों में शामिल थीं। इस सर्च इंजन के डूडल और अन्य प्रोडक्ट की कमान लंबे समय तक उनके हाथ में रही। उन्होंने, 2012 में जब याहू का सर्वोच्च पद संभाला तब कंपनी दस वर्ष सेे अपनी पुरानी स्थिति पाने के लिए संघर्ष कर रही थी। दो वर्ष पहले फॉरच्यून मेग्जीन ने मायर को सर्वाधिक शक्तिशाली महिलाओं की सूची में टॉप पर रखा था।
वर्तमानचुनौतियां : मायरके पास यह साबित करने के लिए अधिक समय नहीं है कि वे याहू को फिर से खड़ा कर सकती हैं। 2013 में टंबलर कंपनी को 68 अरब रुपए में खरीदने के बावजूद कंपनी का वेब बिजनेस चमक नहीं पाया है।
नईपहल :अलीबाबा की हिस्सेदारी को नई कंपनी स्पिनको में लगाने से वे लोग खुश होंगे जो सोचते हैं, नई कंपनी अपने बूते सफलता हासिल करेगी। इस निर्णय की घोषणा के बाद याहू के शेयरों में उछाल गया। कंपनी को 992 अरब रुपए के टैक्स की बचत भी होगी।
आलोचकोंका निशाना :याहू के असंतुष्ट शेयरधारक मायर पर दबाव बनाए रखेंगे। शेयरहोल्डर और मुखर आलोचक एरिक जॉनसन का विचार है, नई याहू अधिग्रहण के लिए आकर्षक टारगेट हो सकती है। कंपनी के एओएल में विलय की संभावना बताई जा रही है।
क्यावे कर सकेंगी? :मायर ने याहू की स्थिति में जैसे सुधार का वादा किया है, सिलीकॉन वैली में उसकी मिसालें कम ही हैं। नई कंपनी खुलने के बाद याहू के शेयरों के मूल्य कम हो सकते हैं।