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भारत और चीन के बीच कई क्षेत्रों में बढ़ती होड़

6 वर्ष पहले
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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के अनुसार 2016 में भारत की आर्थिक विकास दर चीन को पीछे छोड़ देगी। चीन ने अर्थव्यवस्था को नया रूप देने के लिए विकास दर धीमी करने का रास्ता चुना है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारों के कारण भारत की आर्थिक मजबूती विश्व के लिए अच्छी खबर है।

भारत-अमेरिका के बीच निकट रिश्तों से बीजिंग में खतरे की घंटी बज चुकी है। चीन के एक अन्य प्रतिद्वंद्वी जापान से मजबूत व्यापारिक, राजनीतिक संबंधों बनाने के मोदी के प्रयासों ने चीन की चिंता और बढ़ाई है। तीन लोकतांत्रिक देशों- अमेरिका, भारत, जापान की संभावित धुरी ने चीनी नेताओं और सैनिक रणनीतिकारों का ध्यान खींचा है। चीन और भारत स्वाभाविक प्रतिद्वंद्वी हैं। दोनों के बीच नदियों के पानी को लेकर भी विवाद हैं। भारत की सैनिक क्षमता महत्वपूर्ण फैक्टर है। मोदी देश को हथियारों का निर्यातक बनाना चाहते हैं। उन्होंने वियतनाम और फिलीपीन को हथियार बेचने की पहल की है। दोनों देशों से चीन का विवाद है।