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दुष्कर्म पीड़िता मासूम की हालत खराब, प्रशासन ने भी मुंह फेरा
दुष्कर्मपीड़िता तीन साल की मासूम की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वह प्रतिदिन तकलीफदायक जिंदगी जी रही है लेकिन प्रशासन से लेकर महिला बाल विकास विभाग तक ने उससे मुंह फेर रखा है। हालात है वह ठीक तरह से शौच कर पाती है और उसकी देखभाल ठीक से हो पा रही है। माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। उसकी देखरेख करने वाली बुआ फूफा मजदूरी कर जैसे-तैसे गुजर बसर करते हैं। उन्हें खुद के चार बच्चों का लालन पालन भी करना होता है। प्रभारी कलेक्टर मामला गंभीर बताकर तत्काल दिखवाने की बात कहते हैं। हालांकि यह हकीकत दुष्कर्म पीड़ितों पर संवेदनाओं के बड़े सरकारी दावों की पोल जरूर खोलती है।
16 अक्टूबर 2014 को बगड़ी के नयापुरा की मासूम से पास रहने वाले राकेश पिता गुजरा ने दुष्कर्म किया और भाग गया। फिलहाल वह जेल में है लेकिन मासूम की पीड़ा असहनीय होती जा रही है। उसे हर गुरुवार-शुक्रवार को इंदौर के एमवाय अस्पताल उपचार के लिए ले जाना पड़ता है। बुआ-फूफा पीड़ित भतीजी के मल-मूत्र को साफ करने से लेकर इंदौर लाने-ले जाने की व्यवस्था करते हैं। तो कोई सामाजिक संगठन पीड़िता की मदद करने को आगे आता है और प्रशासन।