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बच्चे को इंट्रागेट लगाने के लिए नहीं दिखती नस

6 वर्ष पहले
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वार्ड के बरामदे में इस तरह निर्माण सामग्री पटक रखी है।

29 दिन का होते ही बच्चे को एसएनसीयू से कर देते हैं रैफर, व्यवस्था के ठिकाने नहीं

भास्करसंवाददाता| धार

जिलाअस्पताल के एसएनसीयू में 0 से 28 दिन के नवजात को ही रखने का प्रावधान है। इसके चलते 29वें दिन ही बीमार बच्चा चिल्ड्रन वार्ड में रैफर कर दिया जाता है। इस वार्ड में नवजात बच्चों को रखने के माकूल बंदोबस्त नहीं है। आलम यह है कि बच्चों की बारिक नस में इंट्रागेट लगाने के लिए जो लैंप जलाया जाता है, उसके तार खुले हैं। पिन तक नहीं है। इन खुले तार को सॉकेट में लगाने के दौरान कई बार नर्सों को करंट के झटके लग चुके हैं। 13 ट्यूबलाइट बंद पड़ी है। लेट-बाथ का काम चल रहा है, वहां की सामग्री बरामदे में पसरी होने से गंदगी फैली हुई है। व्यवस्था के नाम पर दो वॉर्मर रखे हैं और दो ऑक्सीजन सिलेंडर हैं।

^आरएमओको अस्पताल के विभिन्न खर्चों के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है। उन्हें बिजली की तीन ट्यूबलाइट संबंधी कार्य करवाने चाहिए। ऐसा नहीं हुआ है तो दिखवाता हूं। डॉ.सीएस गंगराड़े, सिविल सर्जन, धार