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दो मौतों से खौफ, स्टाफ को देख लोगों ने भी पहने मास्क
धारमें 24 घंटे में स्वाइन फ्लू से दो लोगों की मौत होने के बाद अस्पताल स्टाफ, मरीज परिजन खौफजदा हो गए हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को लगभग पूरा स्टाफ मास्क पहने रहा। इन्हें देख लोग भी दहशत में गए। मरीज और उनके परिजन ने रुमाल मुंह पर बांध लिए। कार में बैठे लोगों ने कांच चढ़ा लिए। चाय, कैंटीन वाले भी मास्क पहन ही अस्पताल में चाय पिलाते नजर आए। दरअसल यह खौफ बुधवार शाम से फैला, जब दो मरीजों को जिला अस्पताल लाया गया। आलम यह है कि आम लोग तो दूर स्टाफ के लोग उस आइसोलेशन वार्ड तरफ जाने को तैयार नहीं है, जहां स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज भर्ती हैं। मरीज भर्ती होने के बाद से स्टाफ के लगभग हर सदस्य ने मास्क पहन लिया। अन्य मरीज उनके परिजन में भी यह खबर हो गई कि स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज हैं।
आदेशने बढ़ाया इलाज का इंतजार
तीनदिन पहले सीएमएचओ कार्यालय से सभी निजी अस्पताल और जिलेभर के मेडिकल ऑफिसर-बीएमओ को एक आदेश जारी किया। इसमें स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर सीधे अन्यत्र भेजने के बजाय जिला अस्पताल स्क्रीनिंग सेंटर पर मरीज को भेजने के लिए कहा है। डॉक्टर जैसे ही लक्षण होने की बात कहता है, मरीज को खतरा होने के अंदेशे में परिजन इंदौर ले जाने की जल्दबाजी करते हैं लेकिन जिला अस्पताल रैफर करने के आदेश के चलते यहां लाया जा रहा है। यहां से परिजन के दबाव देने पर रैफर किया जा रहा है, जिससे इलाज शुरू होने का इंतजार बढ़ रहा है।
निजीअस्पतालों में अलग वार्ड नहीं
जिलाअस्पताल में तो स्वाइन फ्लू को लेकर आइसोलेशन वार्ड बना दिया है लेकिन निजी अस्पतालों में अलग वार्ड बनाने के निर्देश नहीं दिए हैं। निजी अस्पतालों को ऐसे मरीजों को तत्काल जिला अस्पताल को रैफर करने के लिए कहा है। गौरतलब है सबसे ज्यादा मरीज गंभीर लक्षण होने पर निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं, जहां अलग वार्ड नहीं होने से संक्रमण फैलने का अंदेशा बना रहता है।
अस्पताल-अस्पताललगाना पड़ी गुहार
लेबड़के 66 वर्षीय बुजुर्ग को 28 जनवरी को सर्दी-खांसी हुई। सांस लेने में दिक्कत आने पर 1 फरवरी को इंदौर ले गए। बुजुर्ग के पुत्र ने बताया सीएचएल अपोलो हॉस्पिटल में स्वाइन फ्लू का मरीज समझ भर्ती नहीं किया। विशेष हॉस्पिटल में भर्ती किया लेकिन स्वाइन फ्लू बताकर एमवाय भेज दिया। एमवाय में जांच के बाद स्वाइन फ्लू नहीं होने की पुष्टि की और बताया कि वार्ड में रखा तो इंफेक्शन का खतरा है। यहां से बांबे हॉस्पिटल ले गए तो वहां भी भर्ती नहीं किया। सुयश हॉस्पिटल में भर्ती किया, जहां तीन-चार दिन आईसीयू में रखने के बाद बुजुर्ग की हालत सुधरी। 11 फरवरी को अस्पताल से छुट्टी हुई।
वेंटीलेटरका ही शुल्क लेंगे इंदौर के अस्पताल
स्वाइनफ्लू को लेकर सीएमएचओ डॉ. वंदना खरे सिविल सर्जन डॉ. सीएस गंगराड़े ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा शासन ने यह व्यवस्था की है कि मरीज यदि इंदौर रैफर किया जाता है और वह एमवाय के बजाय चिह्नित निजी अस्पताल में जाता है तो वहां सिर्फ वेंटीलेटर का खर्च लिया जाएगा। इलाज का शुल्क नहीं लेंगे। इंदौर के लगभग सभी बड़े अस्पताल चिह्नित हैं। उन्होंने बताया हर पीएचसी सीएचसी में एक वार्ड चिह्नित कर दिया है। मरीज आया तो उसे वहां रखा जाएगा।
24घंटे अस्पताल में खड़ी रहेगी एंबुलेंस
प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने बताया स्वाइन फ्लू को लेकर विभाग ने एक 108 एंबुलेंस रिजर्व रखी है। यह 24 घंटे जिला अस्पताल में रहेगी और स्वाइन के मरीजों के लिए उपलब्ध रहेगी। धार शहर में शहरी आशा कार्यकर्ता, एएनएम सुपरवाइजर सभी वार्डों में सर्वे करेंगे। बुखार के मरीज मिलेंगे तो अस्पताल लाएंगे, जहां उपचार होगा।
मरीजों के परिजन बच्चे भी मास्क पहन ऐहतियात बरत रहे हैं।
जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को भोजन देने जा रहे कर्मचारी भी मास्क पहने नजर आए।