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सातबिलिया के डुंगरसिंह ने नहीं सुनी स्कूल की घंटी
शिक्षकों ने ऐसी कोई समस्या नहीं बताई
^मैं मूल रूप से बाग संकुल प्राचार्य हूं। अखाड़ा का आहरण संवितरण का चार्ज है। एचएम या शिक्षकों ने ऐसी कोई समस्या नहीं बताई। जनशिक्षक को भेज कर दिखवाती हूं कि बच्चे कैसे स्कूल तक नहीं पहुंचे हैं। प्रमाण पत्रों के लिए एडमिशन नहीं देने की बात सही नहीं है।” मालतीपानधारीवाल, प्रभारीसंकुल प्राचार्य अखाड़ा
8 विद्यार्थियों नेे आलीराजपुर जिले से स्कूल में लिया एडमिशन
शिक्षकों ने ऐसी कोई समस्या नहीं बताई
^मैं मूल रूप से बाग संकुल प्राचार्य हूं। अखाड़ा का आहरण संवितरण का चार्ज है। एचएम या शिक्षकों ने ऐसी कोई समस्या नहीं बताई। जनशिक्षक को भेज कर दिखवाती हूं कि बच्चे कैसे स्कूल तक नहीं पहुंचे हैं। प्रमाण पत्रों के लिए एडमिशन नहीं देने की बात सही नहीं है।” मालतीपानधारीवाल, प्रभारीसंकुल प्राचार्य अखाड़ा
िवद्यार्थी जो जोबट िवखं के बरखेड़ा स्कूल में पढ़ रहे हैं।
तेज बहादुर सिंह | बाग
अखाड़ाक्षेत्र में बच्चों के स्कूल नहीं पहुंचने से सरकार के स्कूल चलें हम अभियान पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने नारा दिया था कि ‘एक भी बच्चा छूटा, संकल्प हमारा टूटा’। यहां तो कई बच्चे छूट गए हैं। अखाड़ा के सातबिलिया फलिये का 6 वर्षीय डुंगरसिंह-झेतरा ने अब तक स्कूल की घंटी ही नहीं सुनी। दोपहर 12.30 बजे वह मुख्य मार्ग के समीप मवेशी चरा रहा था, पूछने पर उसने बताया रोज मवेशी चराने आता है। यहां ऐसे कई उदाहरण हैं जो अभियान पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मूलनिवासी प्रमाण पत्र नहीं तो एडमिशन नहीं
धनबयड़ीके सिरनी छगन ने बताया पांचवीं पास होने के बाद इसलिए विद्यालय छोड़ दिया कि अखाड़ा का मिडिल स्कूल दो किमी दूर है। यहीं केे सुनील पिता सुखलाल ने भी पांचवीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। 11 साल के सुनील ने बताया उसके पास आय-जाति मूल निवासी प्रमाण पत्र नहीं था। इसलिए उसे स्कूल में एडमिशन नहीं दिया गया।
अखाड़ा संकुल केंद्र के खेरवा के मालपुरा के 8 छात्र-छात्राएं संकुल के किसी विद्यालय में भर्ती नहीं हैं। समीप के अालीराजपुर जिले के जोबट विकासखंड के बरखेड़ा मावि में पढ़ने जा रहे हैं। बरखेड़ा स्कूल की शिक्षिका समता मंडलोई एवं सुशीला जामोद ने बताया जब मालूम पड़ा कि समीप की मालपुरा के लड़के-लड़कियां विद्यालय नहीं जा रहे हैं तो बातचीत की। आठवीं के छात्र दिनेश-इंदरस