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इंजीनियरिंग वंडर्स

7 वर्ष पहले
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डॉ. एम विश्वेश्वरैया रोचक तथ्य और किस्से

बिना तैयारी के कोई काम नहीं

विश्वेश्वरैयाएक बार अपने गांव मुदेनाहल्ली के प्राइमरी स्कूल में गए। उन्होंने टीचर को बच्चों के बीच मिठाई बांटने के लिए 10 रुपए दिए तो टीचर ने बच्चों को संबोधित करने का आग्रह किया। समय कम था, इसलिए विश्वेश्वरैया ने बिना तैयारी के पांच मिनट तक भाषण दिया और फिर बिना एक पल रुके वहां से लौट गए। कुछ दिनों बाद उन्होंने पहले अपनी स्पीच तैयार की और फिर से स्कूल गए। टीचर को पहले की तरह 10 रुपए मिठाई के लिए दिए और भाषण दिया। 1947 में उनकी उम्र 87 साल हो चुकी थी जब वे ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट थे। इसी सिलसिले में उन्हें एक कॉन्फ्रेंस में स्पीच देनी थी। समारोह के दिन सुबह चार बजे जब उनके सहयोगी उठे तब तक विश्वेश्वरैया तैयार होकर अपना स्पीच याद करने में व्यस्त थे।

कामके समय कुछ और नहीं

1952में विश्वेश्वरैया पटना गए थे। गंगा नदी पर पुल निर्माण को लेकर एक प्रोजेक्ट का अध्ययन करने। गर्मी बहुत ज्यादा थी और धूप में खड़े होना मुश्किल था। उन्हें ऐसी जगहों पर भी जाना था जहां कार नहीं पहुंच सकती थी। उनकी उम्र 92 साल थी, इसलिए विश्वेश्वरैया को कुर्सी में वहां तक ले जाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन वे कार से उतरते और पैदल ही साइट तक जाते। उनके रुकने की व्यवस्था सरकारी गेस्टहाउस में की गई थी। लेकिन वे रातभर रेलवे कंपार्टमेंट में रहे ताकि काम जल्दी खत्म हो जाए।

मैसूरयूनिवर्सिटी की चर्चा हुई तो लोगों ने पागल कहा

मैसूरका दीवान रहते हुए उन्होंने वहां एक यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव रखा। गवर्नर सहित रियासत के सभी अधिकारी अंग्रेज थे, इसलिए उन्हें तो इसका विरोध करना ही था। लेकिन पढ़े-लिखे भारतीय भी उनके खिलाफ खड़े हो गए। लोगों ने उन्हें पागल तक कह दिया। लेकिन विश्वेश्वरैया अपनी बात पर अड़े रहे और उनकी जिद के चलते ही 1916 में मैसूर यूनिवर्सिटी की स्थापना हो सकी।

लंबाई 150 किमी लागत : 4,000 करोड़

{ मुंबई को देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों से जोड़ता है।

लंबाई 111 किमी। लागत : 4,000 करोड़

{इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर का हिस्सा है।

लंबाई 158 किमी। लागत : 6,696 करोड़

{ हैदराबाद शहर के चारों ओर बनी है।

लंबाई 124 किमी।

{कानपुर को ग्रेटर नोएडा से जोड़ता है।

लंबाई 165 किमी। लागत: