- Hindi News
- National
- स्निफर डॉग जहां अड़कर बैठा, वहीं 35 फीट बर्फ में दबे थे हनुमन, एयर बबल के सहारे 6 दिन तक लेते रहे सांस
स्निफर डॉग जहां अड़कर बैठा, वहीं 35 फीट बर्फ में दबे थे हनुमन, एयर बबल के सहारे 6 दिन तक लेते रहे सांस
सियाचिन का सोनम पोस्ट। ऊंचाई 19 हजार 600 फीट। मद्रास रेजीमेंट के 10 जवान 3 फरवरी की सुबह पैट्रोलिंग के वक्त बर्फीले तूफान की चपेट में आ गए। सभी को शहीद मान लिया गया। लेकिन सेना का सर्च ऑपरेशन जारी था। वहां एक मेडिकल बेस भी तैयार किया गया। इस उम्मीद में कि यदि कोई जिंदा बचे तो उसे फौरन मदद दी जा सके।
125 घंटे बीत चुके थे। कई जगहों पर तो 45 फीट तक खुदाई की जा चुकी थी। कहीं कोई संकेत नहीं थे। लेकिन एक स्निफर डॉग बार-बार एक ही जगह पर जा कर बैठ रहा था। सोमवार को टीम ने वहां और खुदाई की। 4 फीट चौड़ा और 35 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद टीम को एक जवान नजर आया। उसकी सांसें चल रही थीं। ये जवान था -लांस नायक हनुमनतप्पा। सेना के मुताबिक हनुमनतप्पा को जब बाहर निकाला गया तो वो होश में थे। लेकिन सुस्त और नींद में लग रहे थे। सदमे में थे और शरीर का पानी सूख चुका था। बिना कुछ खाए पांच दिन गुजारने के बाद उन्हें डिहाईड्रेशन के अलावा ठंड से हाईपोथर्मिया हो गया था। उन्हें डॉक्टरों तक पहुंचाया गया। शेष|पेज 4 पर
जो किसी जिंदा जवान के बाहर निकल आने की उम्मीद में ग्लेशियर पर इंतजार कर रहे थे। उन्हें तुरंत इंट्रावीनस फ्लूड, ऑक्सीजन दिया गया और वहां तैयार किए गए वॉर्म टेंट में रखा गया। सोमवार की रात उन्होंने वहीं गुजारी। ग्लेशियर में सर्व कर चुके आॅफिसर ने बताया कि जिस जगह हनुमंत दबे थे, वहां एयर बबल बन गया था। उसी के जरिए उन्हें ऑक्सीजन मिल रही थी। उन पर टेंट का एक टुकड़ा भी आ गिरा था। इससे बर्फ से उनका सीधा संपर्क नहीं रहा। वह जगह कुछ गुफा जैसी बन गई। यदि बर्फ के बीच फंस जाएं तो मुंह और नाक के पास हाथों से बनाया छेद भी आपको ऑक्सीजन देता है। ग्लेशियर पोस्टिंग के पहले इसकी ट्रेनिंग सभी को दी जाती है।
जवान की हालत नाजुक थी। मंगलवार सुबह डॉक्टरों की एक टीम उन्हें हेलिकॉप्टर से सियाचिन बेस कैंप ले गई। इसके बाद थॉइस एयर बेस और वहां से विमान से दिल्ली लाया गया। अभी आर्मी के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। हनुमनतप्पा कोमा में हैं। लीवर और किडनी ठीक से काम नहीं कर रहे। आश्चर्य की बात है कि बर्फ की दीवार के नीचे दबे रहने के बावजूद उन्हें न ही हड्डी में चोट आई है, न ही बर्फ से होनेवाला फ्रॉस्ट बाइट का कोई घाव है। वो वेंटीलेटर पर हैं। शरीर के ठंडे पड़ चुके अंगो में दोबारा ब्लड फ्लो किया गया है। लद्दाख में सेना के कोर कमांडर ले. जनरल एसके पटयाल कहते हैं कि वहां एवलांच नहीं आया था। वो तो बर्फ की ऐसी दीवार थी जो कांक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होती है।
हनुमनतप्पा की मां, प|ी और एक साल का बच्चा।
मां ने कहा- बेटे ने सपने में आकर बाेला था कि लौटकर जरूर आऊंगा
हनुमनतप्पा के जिंदा होने की खबर पर परिवार का हर कोई खुशी से रो पड़ा। मां बोली- ‘बेटा मेरे सपने में आया था। बोला कि लौटकर आऊंगा। लो आ गया।’ पिता बाेले- ‘उसका नाम ही हनुमनतप्पा है। उसे कौन मार सकता है।’ प|ी ने कहा- यह मेरे लिए पुनर्जन्म जैसा है।
सियाचिन; जिंदा निकले लांस नायक अभी कोमा में, अगले 48 घंटे अहम
एक जवान कोे जिंदा बचा लेने की कहानी
लांस नायक हनुमनतप्पा