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सिद्धिविनायक मंदिर पर भी थी हमले की योजना : हेडली

5 वर्ष पहले
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मुंबई में 26/11 के हमले के साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली ने मंगलवार को नए खुलासे किए। उसने दावा किया कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद व हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों को आईएसआई से पैसा मिलता है। 2007 में सिद्धििवनायक मंदिर की रेकी भी की थी।

मुंबई के विशेष जज जीए सनप की कोर्ट में हेडली ने लगातार दूसरे दिन अमेरिकी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज कराए। उसने कहा कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ ही लश्कर के लिए भी काम कर रहा था। इस दौरान सेना के कई अधिकारियों से मुलाकात करने का मौका मिला। शेष|पेज 4 पर





उसने बताया कि आईएसआई में ब्रिगेडियर रियाज मुंबई हमले के मास्टरमाइंड लश्कर कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी का हैंडलर था। बयान बुधवार को भी दर्ज किए जाएंगे।

हेडली से विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम सवाल पूछ रहे थे। निकम के मुताबिक, हेडली ने कोलाबा में भगत सिंह मार्ग का वीडियो बनाया था। इस सड़क पर स्थित लियोपोल्ड होटल, पुलिस स्टेशन और रेस्त्रां का वीडियो बनाया था।

हेडली के नए खुलासे
हमलों के लिए पूरा लश्कर ग्रुप जिम्मेदार- ‘मुंबई हमले के लिए कोई एक शख्स जिम्मेदार नहीं है। बल्कि पूरा लश्कर ग्रुप ही जिम्मेदार था। लखवी टॉप कमांडर था। इस नाते माना जा सकता है कि अंतिम आदेश उसका ही होता था।’

भारतीय सेना में जासूसों की भर्ती करने को कहा- ‘आईएसआई के तीन अधिकारी कर्नल शाह, लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा और मेजर समीर अली के साथ ही रिटायर्ड सैन्य अफसर अब्दुल रहमान पाशा से संपर्क में था। मेजर इकबाल ने 2006 की शुरुआत में लाहौर में मुझे कहा था कि भारतीय सेना की जासूसी के लिए कुछ सैनिकों को जासूस बनाओ। मैं फोन पर समीर अली के संपर्क में था। वह भी चाहता था कि मैं भारत में रहकर जासूसी करूं।’

लश्कर और अल-कायदा के साथ थे- ‘मैं 2003 में लाहौर की एक मस्जिद में अब्दुल रहमान पाशा (रिटायर्ड सैन्य अफसर) से मिला था। जब मैं पाशा से मिला तब वह लश्कर के साथ काम करता था। उस समय उसका अल-कायदा से कोई रिश्ता नहीं था। लेकिन दो साल बाद उसने लश्कर छोड़कर अल-कायदा में शामिल हो गया। लश्कर और अल-कायदा के साथ मिलकर काम कर रहे थे।’

मसूद अजहर भी आता था लश्कर के कैम्प में - ‘जैश-ए-मोहम्मद बनाने वाले मसूद अजहर को मैंने देखा है। अक्टूबर 2003 में लश्कर की ट्रेनिंग के दौरान वह भी अतिथि वक्ता के तौर पर संबोधित करने आया था।’

अमेरिका ने भारत की मदद के प्रति प्रतिबद्धता जताई
वॉशिंगटन| अमेरिका ने हेडली की गवाही के बाद मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को सजा दिलवाने में भारत की मदद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर दोहराई है। विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्वी ने कहा, ‘अमेरिका के न्याय विभाग ने हेडली की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दिलवाने में भारत की मदद की। अमेरिका इस मामले में अपनी ओर से भारत को हर मदद करेगा ताकि मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा दिलाई जा सके। अपने कानून के दायरे में भारत की सहायता करने के लिए अमेरिका प्रतिबद्ध है। अमेरिका का भारत के साथ बहुत से क्षेत्रों में मजबूत संबंध है। इनमें कानून को लागू करने का क्षेत्र भी शामिल है। अमेरिका भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है।’

1 ‘मैंने जितना सुना है, उसके आधार पर कह सकता हूं कि लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद को आईएसआई वित्तीय, सैन्य, नैतिक मदद देती है।’

2 ‘नवंबर-दिसंबर 2007 में साजिद मीर और अबु काहफा के पास सूचना थी कि ताज होटल में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की बैठक होने वाली है। लेकिन कॉन्फ्रेंस हॉल तक हथियार ले जाना मुमकिन नहीं था।’

3 ‘2007 तक हमले के लिए मुंबई के टारगेट तय नहीं थे। साजिद मीर ने सिद्धिविनायक मंदिर का वीडियो लाने को कहा था। ताज होटल की रेकी की जिम्मेदारी भी मुझ पर थी। मैंने सिद्धिविनायक मंदिर के साथ ही नवल एयर स्टेशन की रेकी भी की थी।’

आईएसआई की टेरर लिंक बेनकाब
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