363 दिन ताले में बंद रहती है महल व राजा बख्तावरसिंह की प्रतिमा
बस स्टैंड के समीप 1857 के प्रथम क्रांतिकारी अमर शहीद राजा बख्तावरसिंह के महल पर साल के 363 दिन ताले लगे रहते हैं। 10 फरवरी शहीद दिवस और 14 दिसंबर जयंती को साल में सिर्फ दो दिन ग्राम पंचायत ताला खोलकर राजा को श्रद्धांजलि दी जाती है। बाकी के दिनों में राजा की घुड़सवार प्रतिमा और चौमुखा महल पुरातत्व विभाग के ताले में बंद रहता है। ऐसा पिछले 12 वर्षों से चल रहा है।
वर्ष 2004 में राज्य पुरातत्व विभाग ने महल को अधिग्रहित किया था। तब चौमुखे महल के दरवाजे पर ताले लगा दिए गए थे। बाहर से आने वाले पर्यटक भी यहां पर ताले लगे देख लौट जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया 12 वर्षों में पुरातत्व विभाग का कोई अधिकारी महल की सुध लेने नहीं आया। महल परिसर के अंदर स्थित चौमुखा महल वर्षों से जीर्ण-शीर्ण पड़ा है। महल में मौजूद राजा की घुड़सवार प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के मामले भी ताले लगे होने के बावजूद सामने आ चुके हैं।
20 लाख की मरम्मत दो साल भी नहीं टिकी
पुरातत्व विभाग ने महल परिसर में दो वर्ष पूर्व 20 लाख रुपए खर्च कर मरम्मत कार्य प्राइवेट ठेकेदार से करवाया था। यहां पर निर्माण के बाद परिसर में लगी फर्शियां भी उखड़कर अलग हो गई। घुड़सवार प्रतिमा के पास तैयार किया गया प्लेटफार्म भी जगह-जगह से टूट गया है। महल परिसर के बाहर दीवारों के पास बनाया गया ओटला भी देख-रेख के अभाव में टूट रहा है। विभाग को महल के अंदर पहले चौमुखे महल का उद्धार करना था, लेकिन मरम्मत का नाम देकर 20 लाख रुपए परिसर के फर्श पर लगा दिए गए।
कोई अधिकारी नहीं आता सुध लेने
पुरातत्व विभाग ने औपचारिक संरक्षण दिया है। यहां की सुध लेने कोई अधिकारी नहीं आता है। पर्यटक भी यहां ताला देखकर वापस लौट जाते हैं। - नीलांबर शर्मा, कांग्रेस नेता
किले को लेकर प्राक्कलन भोपाल भेजा है
किले को लेकर प्राकलन भोपाल भेजा जा चुका है। जिसमें चौमुखा महल व अन्य निर्माण होगा। - एसएन राय, उपसंचालक, राज्य पुरातत्व विभाग, इंदौर
वसंत पंचमी के कारण
शहीद दिवस पर पंचायत स्तर पर ही होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम
अमझेरा | बुधवार को राजा बख्तावरसिंह के 159वें बलिदान दिवस पर ग्राम पंचायत स्तर पर ही श्रद्धांजलि दी जाएगी। पूर्व में यहां प्रदेश स्तर के मंत्रियों के आने की जानकारी थी पर वसंत पंचमी को देखते हुए कई प्रमुख लोगों का आना टल गया है। पंचायत ने मंगलवार को श्रद्धांजलि का कार्यक्रम जारी कर दिया है। सचिव भारतसिंह सोलंकी ने बताया ग्रामिणों की सहमति से सुबह महल परिसर से स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामिणों की प्रभातफेरी निकाली जाएगी। जो श्रद्धांजलि सभा में परिवर्तित होगी। नागणेचा मंदिर पर पूजन कर घुड़सवार प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा।
इसके बाद रात में अमर शहीद राजा बख्तावरसिंह के बलिदान दिवस पर स्वराज संस्थान संचालनालय भोपाल बस स्टैंड पर अमझेरा का राणा नाटक का मंचन करेगा। संस्थान के अधिकारी कोहली ने बताया नाटक का मंचन रात 8 बजे किया जाएगा। 10 वर्ष पूर्व नाटक के मुख्य कलाकार का किरदार निभाने वाले की मौत हो जाने से नाटक का मंचन बंद कर दिया गया था। अब नए कलाकार के साथ मंचन किया जा रहा है।
यह हैं इतिहास
इंदौर के एमवायएच कंपाउंड में अंग्रेजों ने दी थी फांसी
राजा बख्तावरसिंह को अंग्रेजों ने 10 फरवरी 1858 को इंदौर के एमवायएच कंपाउंड में नीम के पेड पर फांसी दी थी। इतिहासकारों के मुताबिक बख्तावरसिंह अमझेरा स्टेट के राजा थे, जिनके राज्य में 52 परगने जिले थे। इनमें राजस्थान का बूंदी, गुजरात का ईडर, मालवा का शुजालपुर, शाजापुर, झाबुआ, रतलाम जैसे शहर शामिल थे।
देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो रहा चौमुखा महल
यह सही है कि पुरातत्व विभाग ने जिस दिन से महल को अधिग्रहित किया है, तब से लेकर 12 सालों में बावड़ी के निर्माण व महल के परिसर पर ही लाखों रुपए की राशि व्यय कर दी है। जबकि चौमुखा महल देखरेख के अभाव जीर्ण-शीर्ण हो रहा है। विभाग को सुध लेना चाहिए। इसके लिए मैने पूर्व में शासन को पत्र भी लिखा है। - रवि पाठक, भाजपा नेता
राजा बख्तावरसिंह का महल देख रेख के अभाव में ऐसे ही बंद पड़ा रहता है।