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भोपाल गैस पीड़ित मामला : दो दिन में जवाब दे केंद्र सरकार

5 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के लिए अस्पताल, डिस्पेंसरीज और हेल्थ कार्ड आदि को लेकर दायर विभिन्न मामलों में केंद्र सरकार को जवाब पेश करने दो दिन की मोहलत दी है। मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस संजय यादव की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को नियत की है। केंद्र को इससे पहले कई बार मोहलत दी गई, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव ने जवाब पेश किया था।

पिछली सुनवाई के दौरान भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष समिति के संयोजक एनडी जयप्रकाश ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि मुख्य सचिव एंटोनी जेसी डिसा और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव चैरी सिंह ने हस्ताक्षरयुक्त शपथ पत्र पर झूठी जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह किया है।

भोपाल गैस उत्पीड़न महिला समिति का भी आरोप है कि राज्य सरकार गैस पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने में पूरी तरह विफल रही है और दूसरी ओर कोर्ट में आदेश पालन की झूठी रिपोर्ट पेश कर रही है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी है, लेकिन राज्य सरकार इसके लिए गंभीर नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक ने सैकड़ों आदेश जारी किए। गैस पीडि़तों के इलाज के लिए गाइडलाइन जारी की। सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी गठित की। आरोप लबाया गया कि अभी तक सभी पीड़ितों को स्मार्ट कार्ड और हेल्थ बुक जारी नहीं की गईं, जो कि अत्यंत आवश्यक है।

भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास अस्पताल, कमला नेहरू अस्पताल, टाटा मेमोरियल अस्पताल, सहित पीड़ितों के लिए अन्य अस्पतालों और क्लीनिकों में चिकित्सकों, विशेषज्ञों, पर्याप्त दवाएं, जांच उपकरण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का सही रूप में पालन नहीं होने के कारण संघर्ष समिति व अन्य ने मई 2015 में अवमानना याचिका दायर की थी। नोटिस के जवाब में मुख्य सचिव और सचिव ने 16 सितंबर को शपथ पत्र पर जवाब प्रस्तुत कर कहा कि आदेशों का पूरा पालन हो रहा है, जबकि वास्तविकता कुछ और है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामले में प्रदेश के बड़े अधिकारियों द्वारा इस तरह का रवैया बहुत ही शर्मनाक है। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट को आईपीसी की उक्त धाराओं के तहत संज्ञान लेकर झूठा शपथ पत्र पेश करने और कोर्ट को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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