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इन दो कलंक को मिटाकर पूछें कि कैसे होने चाहिए कुलपति?

7 वर्ष पहले
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शांति निकेतनमें विश्व भारती की स्थापना किसने की? कोई भी बता देगा। और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की? किसी को नहीं पता।

इसीलिए पतन होता है। कुछ महान् हस्तियां, महान सपने साकार करती हैं। जैसा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने विश्व भारती के रूप में किया। किन्तु उनके बाद की नेतृत्व पंक्ति इतनी कमज़ोर रही कि उनका सपना तो टूट ही गया - दूसरों के सपनों को और तोड़ गया। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी कोई एक हजार वर्ष पहले बनी थी। किसी को कुछ नहीं पता कि किसने वो सपना देखा? कैसे बनी? वास्तव में कब बनी? किन्तु यह विश्वविद्यालय आज भी उतने ही गौरव के साथ संचालित है। क्योंकि एक के बाद एक नेतृत्व संभालने वाले श्रेष्ठ शिक्षक आते गए।

गुरुदेव की गरिमा तो अजर-अमर है/रहेगी। किन्तु उनकी शिक्षा के सर्वोच्च स्तर के संस्थान को नष्ट करने वालों को कैसे, क्यों और किसने चुना - यह यक्ष प्रश्न अनुत्तरित ही है। आज विश्व भारती, कुलपति सुशांत दत्तागुप्ता के भयावह कारनामों से कलुषित है। दूसरा जादवपुर विश्वविद्यालय कुलपति अभिजीत चक्रवर्ती के बर्बर अत्याचार से कराह रहा है।

दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना भारत की गरिमामय शैक्षणिक परंपरा की प्रतीक है। विश्व भारती गुरुदेव ने स्वयं स्थापित की। कलकत्ता में जादवपुर विश्वविद्यालय बंगाल के प्रखर राष्ट्रवादियों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनाया था। गुरुदेव के साथ अनेक बुद्धिजीवी और क्रांतिकारी इसके लिए आगे आए थे। इतिहास है कि अंग्रेजों ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी को ब्रिटिश तौर-तरीकों की शिक्षा का कुछ ऐसा माध्यम बना दिया था कि वहां ‘भारतीय अंग्रेज’ बनने लगे थे। इस बात का भी जिक्र है कि क्रांतिकारियों ने इसे ‘ग़ुलामखाना’ घोषित कर दिया था। इसीलिए, स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गजों ने नेशनल काउंसिल की स्थापना की थी - जो आज़ादी के बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी कहलाई।

यानी अत्याचार के विरुद्ध स्थापित विश्वविद्यालय ही आज अत्याचार की प्रयोगशाला बना दिया गया है। वह भी उसी के कुलपति द्वारा। आधी रात को, कुलपति चक्रवर्ती भारी पुलिस बल से छात्रों के रोष को रौंदते हैं। छात्रों का दोष है उनका रोष। जो एक छात्रा की गरिमा नष्ट करने के कुप्रयास के विरुद्ध कुलपति की चुप्पी पर है। पहले एक शिक्षक ऐसा किसी मासूम, नई छात्रा के साथ कर चुके हैं। इस बार होस्टल में छात्रों ने किया। भयंकर वातावरण। भ्रष्ट ने