मूलस्वरूप में लौटेगा होशंगशाह का मकबरा
^जल्द ही भवन पुराने स्वरूप में लौट आएगा। पत्थर चुके हैं। नक्काशी करने वाले भी आने वाले हैं। एक्सपर्ट कारीगर काम करेंगे। डीकेरिछारिया, वरिष्ठसंरक्षण सहायक, पुरातत्व विभाग
प्रति सेकंड टपकती थी बूंद
इसभवन में कुछ समय पूर्व तक पानी की एक बूंद प्रति सेकंड गिरती थी। इससे महल में देर शाम तक पानी जमा हो जाता था। स्मारक के कोने में आज भी वह जगह है, जहां वह बूंद गिरती थी।
केमिकल से मकबरे की सफाई की जाएगी।
सुनील तिवारी | मांडू
प्रसिद्धपर्यटन नगरीय मांडू में संगमरमर की चुनिंदा इमारतों में सबसे आकर्षक होशंगशाह के मकबरे को पुराने स्वरूप में लौटाने की तैयारी की जा रही है। स्मारक के चारों और छत के छज्जे नए सिरे से बनाए जा रहे हैं। जीर्णशीर्ण पत्थरों को भी बदला जाएगा। वैसा ही स्वरूप दिया जाएगा जिसमें यह बरसों पूर्व निर्माण हुआ था। इस काम पर एक करोड़ रुपए खर्च होंगे।
गौरतलब है कि मांडू में 61 संरक्षित इमारतें हैं। इनमें शामिल होशंगशाह के मकबरे का जीर्णोद्धार जल्द शुरू होने वाला है। पुरातत्व विभाग ने पूर्व में इसका प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसकी स्वीकृति मिलने पर संगमरमर के पत्थर यहां गए हैं। राजसमंद (राजस्थान) से ढोली खान पत्थरों की नक्काशी के लिए यहां आएंगे। पूर्व में भी विभाग द्वारा लाल पत्थर वाले स्मारकों का जीर्णोद्धार पुराने स्वरूप को लौटाने के लिहाज से किया गया था। इसके अच्छे परिणाम के बाद अब संगमरमर से बनी इमारत का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
होशंगशाहगौरी ने किया था निर्माण
स्थानीयगाइड के अनुसार यह मकबरा भारत वर्ष की विशिष्ट इमारतों में शामिल है। मांडू के प्रथम स्वतंत्र सुल्तान होशंगशाह गौरी ने 1405 ई. में इसका निर्माण करवाया था। यह भवन एक प्लेटफॉर्म पर बना है। मुख्य द्वार दक्षिण में है। भवन के चारों ओर खुला मैदान है। भवन प्राचीर से रक्षित किया गया है, जिसके प्रत्येक छोर की दूरी निश्चित एवं समान है। ताजमहल निर्माण के पूर्व शाहजहां ने उस्ताद हामिद खां उनके साथियों को यहां मकबरे को देखने भेजा था।