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अवार्ड लेने तक किया कचरा प्रबंधन, फिर फैली पॉलीथिन
स्मारकों के संकेतक आदि के पास थैली पॉलिथीन कचरा प्रबंधन की हकीकत बता रही है।
जिम्मेदार बोले...
^पुन: पॉलिथीन मुक्त करने की मुहिम चलाई जाएगी। जल्द ही नगर के लोगों को बुलाकर बैठक रखी जाएगी।” हेमचंदकोष्टि, सीएमओ
^स्थानीय निकाय से बात कर मांडू को पुन: पॉलिथीन मुक्त शहर बनाने के प्रयास करेंगे।” नीरजकुमारसिंह, एसडीएमधार
^अवार्ड के बारे में पता नहीं है। जनसहयोग से पुन: प्रयास करेंगे। मांडू के मकानों को एक रंग में करने के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे।” जयश्रीकियावत, कलेक्टरधार
भास्कर संवाददाता. मांडू
नागरिकसुविधाओंके लिहाज से श्रेष्ठ पर्यटन स्थल का अवार्ड लेकर मांडू नगर परिषद के जिम्मेदारों ने कर्तव्य से मुंह फेर लिया है। अवार्ड मिलने का सबसे अहम बिंदु पॉलीथिन पर प्रतिबंध था। यहीं पर पिछड़ गए हैं। जगह-जगह कचरा पसर गया है। पर्यटकों को हर चीज पॉलीथिन, डिस्पोजल में दी जा रही है।
वर्ष 2011-12 में मप्र पर्यटन विकास निगम ने मांडू को बेस्ट सिविक मैनेजमेंट ऑफ टूरिस्ट डेस्टीनेशन का खिताब दिया था। तत्कालीन सीएमओ आरती खेड़ेकर ने बताया कचरा प्रबंधन, पॉलीथिन प्रतिबंध, सुरक्षा बंदोबस्त समेत छह बिंदुओं के आधार पर आंकलन किया गया था, जिसमें मांडू को श्रेष्ठ आंका था। दो साल बाद हालात पलट गए हैं। नगर परिषद के वर्तमान जिम्मेदारों का कचरा प्रबंधन पर ध्यान नहीं है। स्मारकों के पास कचरा फैला है। पूर्व में हर घर में डस्टबिन दिए थे लेकिन यह व्यवस्था भी ठप हो गई। पूर्व एसडीएम रवींद्र चौधरी ने मांडू में खजुराहो की तर्ज पर मकानों का बाहरी रंग एक जैसा करने की पहल भी की थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उनके तबादले के बाद इस विषय पर चर्चा तक नहीं हुई।
कुछरहवासी अपने स्तर पर प्रयासरत
रेस्टोरेंटसंचालक मांगीलाल जायसवाल ने कहा 2010 से ही होटल में कागज कपड़े की थैली बनाकर सामग्री देता हूं। पॉलीथीन के खिलाफ हूं। अशोक निगम ने बताया पॉलिथीन पूर्णत: प्रतिबंधित कर देना चाहिए। पर्यटन विभाग के डीके रिछारिया ने बताया यदि मांडू में मकानों पर एक जैसा कलर होता है तो बहुत अच्छी बात होगी। पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा।
मांडू नगर परिषद को 2011-12 में मिला था बेस्ट सिविक मैनेजमेंट ऑफ टूरिस्ट डेस्टीनेशन का अवॉर्ड
अनदेखी |