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राजराजेश्वर मंदिर

6 वर्ष पहले
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शिलान्यास पर लिखे संदेश का अर्थ पता लगा

अमका-झमका तीर्थ परिसर में चल रहे यज्ञ का चौथा दिन, पीएचडी डॉ. आशीष कानूनगो ने पढ़ा

अमका-झमका तीर्थ स्थित राजराजेश्वर महादेव मंदिर में दीवार पर लगे शिलान्यास पर लिखे संदेश का पता लगा है। सनावद से यज्ञ में आए पीएचडी डॉ. आशीष कानूनगो ने पत्थर पर उल्लेखित शब्दों का अर्थ बताते हुए कहा मंदिर पर राजा बख्तावर के वंश ने 200 वर्ष पूर्व 1800 इ. में जीर्णोद्धार करके विजय यज्ञ आयोजन किया था। मंदिर का शिवलिंग पश्चिम मुखी है जो महेश्वर शिवलिंग की तरह है। इस तरह पश्चिम मुखी शिवलिंग शत्रुओं पर अजेयता और खोए हुए तथा नष्ट किए कार्यों को प्राप्त करने के लिए स्थापित किए जाते हैं। तीर्थ पर गुफा में पूर्व मुखी बैजनाथ महादेव स्थापित हैं जो प्रीति, स्नेह, कीर्ति, वैभव, ख्याति प्राप्त करने के लिए स्मरण किए जाते हैं। इस गुफा में स्थापित अन्य शिवलिंगों को पांडवों ने स्थापित किया था।

शिखरकलश का धान्याधिवास मंत्रोच्चारण

यज्ञके चौथे दिन स्थापित देवताओं का पूजन, रुद्राभिषेक, हवन, चंडी पाठ के साथ शिखर कलश का धान्याधिवास मंत्रोच्चारण किया गया। रविवार को यज्ञ में चंडीपाठ का हवन होगा। औषधियों, फल, शाक, मक्खन, शहद, पंचमेवा से आहुतियां दी जाएगी। शाम को आरती के बाद तीर्थ से शिवयात्रा नगर भ्रमण करेगी जिसको लेकर वाहनों मे प्रचार-प्रसार किया जाएगा। यात्रा शाम को प्रारंभ होगी। सोमवार को यज्ञ स्थल पर पूर्णाहुति के बाद भंडारा दत्त मावली इंदौर के संत अण्णा महाराज के सत्संग होंगे। बड़ी संख्या मेंे श्रद्धालु यज्ञ में शामिल होने पहुंच रहे हैं।

अमझेरा. मंदिर में दुग्धाभिषेक किया गया।