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^25 जून को और फिर 5 जुलाई को सर्वे किया

6 वर्ष पहले
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^25 जून को और फिर 5 जुलाई को सर्वे किया था। 14 जुलाई को शाला प्रबंध समिति के सदस्यों को लेकर उनके घर गए। सावित्रीबाई ने स्पष्ट कह दिया कि चार रोटी के लिए स्कूल नहीं भेजूंगी। बच्चों के स्कूल आने की कोई उम्मीद नहीं देखते हुए नाम काटे। हमने तो हमारी ओर से सारे प्रयास किए लेकिन बच्चों की मां नहीं मानी।” दिलीपजैन, प्रभारी सहायक शिक्षक

इनका यह कहना है

जवाब में ही उलझे

छुट्टीपर गए सहायक शिक्षक दिलीप जैन मामले की जानकारी मिलते ही जवाब प्रस्तुत करने के लिए दोपहर में ही कलेक्टोरेट पहुंच गए। उन्होंने 14 जुलाई 2014 का वह पंचनामा दिखाया जिसमें बच्चे राकेश और उसकी बहन मधु का नाम स्कूल से काटने की पुष्टि है। पंचनामे में लिखा है कि बच्चों की मां मानसिक रूप से बीमार है और बच्चों को शाला में किसी भी स्थिति में भेजने के लिए तैयार नहीं है। सतत अनुपस्थित रहने के कारण शाला प्रबंध समिति ने दोनों के नाम शाला से खारिज करने का निर्णय लिया है। पंचनामा देख अफसर हैरान रह गए। दरअसल शिक्षा का अधिकार कानून अंतर्गत सतत अनुपस्थित रहने पर भी बच्चे का नाम शाला से नहीं काटा जा सकता। समझाइश के बाद भी स्कूल नहीं भेजने पर माता-पिता पर कार्रवाई का प्रावधान है।

एडमिशनअगस्त तक, जुलाई में काटे नाम?

सर्वशिक्षा अभियान में 15 से 30 जून तक घर-घर सर्वे कर एक-एक बच्चे की जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद 1 से 7 जुलाई तक नामांकन सर्वे चलता है। 30 अगस्त तक एडमिशन देते हैं। जुलाई में ही पंचनामा बनाकर बच्चों के नाम काटने से विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों को स्कूल नहीं भेजने वाले पालकों को समझाइश देने, एक बार नहीं मानने पर बार-बार समझाइश देने और उसके बाद भी नहीं मानने पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने का प्रावधान है, इस प्रकरण में ऐसा कुछ नहीं किया गया। पंचनामा बनाकर स्कूल में रख लिया गया जो खुलासा होने पर प्रस्तुत कर दिया।

^संबंधित शिक्षक को नोटिस जारी करेंगे। पूछेंगे कि कितनी बार बच्चों को लाने का प्रयास किया गया और बच्चों के नाम काटने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया। शनि महाराज के नाम पर भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूल लाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। जनशिक्षकों की ड्यूटी लगाकर ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ेंगे।” भरतराजराठौर, बीआरसी धार