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हकीकत |कलेक्टोरेट में भीख मांग रहे थे दो बच्चे, पकड़कर पड़ताल की तो सामने आई हकीकत, शिक्षा का अधिकार कानून ताक पर
कलेक्टोरेट में भीख मांगते दो बच्चे शनिवार को पकड़े तो सर्व शिक्षा अभियान की कड़वी हकीकत सामने आई। बच्चों को उनके स्कूल ले गए तो पता लगा कि अभियान में एक-एक बच्चे को स्कूल में दर्ज कराने के लिए घर-घर होने वाले सर्वे के सातवें दिन ही दोनों के नाम स्कूल से काट दिए गए। जबकि शिक्षा का अधिकार कानून में सतत अनुपस्थित रहने के बावजूद किसी बच्चे का नाम काटा नहीं जा सकता। नाम काटने का आधार यह बताया कि बच्चों की मां मानसिक रूप से बीमार है। जबकि बच्चों को पकड़ स्कूल लाने पर उनकी मां पहुंची तो सारे सवालों के सीधे जवाब दिए, मानसिक रूप से बीमार जैसी कोई बात नहीं कही।
दरअसल राकेश पिता राजू और उसका भाई अर्जुन शनिवार को कलेक्टोरेट में घूम रहे थे। कमंडल में शनि महाराज की प्रतिमा रख भीख मांग रहे थे। सूचना पर बीआरसी भरतराज राठौर टीम के साथ पहुंचे और बच्चों से पूछा कि कहां रहते हो और किस स्कूल में पढ़ते हो। उन्होंने बताया कि मतलबपुरा में रहते हैं। स्कूल नहीं जाने की बात कहते हुए बताया कि पहले मतलबपुरा प्रावि क्र. 16 में पढ़ते थे। बीआरसी दोनों बच्चों को कार में लेकर मतलबपुरा स्कूल पहुंचे। बच्चों के चेहरे देख स्कूल के कुछ शिक्षक तो पहचाने नहीं। एक शिक्षिका ने बताया इनकी मां को हवा का चक्कर है। इसलिए स्कूल नहीं आते। बीआरसी ने मां को बुलाकर लाने को कहा। कुछ ही देर में मां सावित्री गई। वह कार में बैठे बच्चों को देख रोने लगी। बीआरसी ने कहा उन्हें छोड़ देंगे लेकिन पहले यह बताओ कि बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय भीख क्यों मंगवाते हो। महिला ने कहा बच्चों के पिता भी भीख मांगते हैं। समझाइश पर महिला ने बच्चों को स्कूल भेजने की बात कही और बच्चों को ले गई। बीआरसी ने स्कूल की उपस्थिति पंजी देखी पर दोनों के नाम नहीं थे। बीआरसी शाला त्यागी सर्वे रजिस्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश देकर लौट गए।
स्कूल में 91 बच्चे दर्ज हैं। शनिवार को 22 ही उपस्थित थे।
धार. शनि महाराज के नाम पर भीख मांग रहे बच्चों को स्कूल लेकर पहुंचे बीआरसी।