भोजशाला में अखंड पूजा; नमाज
भास्कर लाइव
धार से प्रशांत कालीधार और योगेश पंवार
शुक्रवार को जब सूरज पूरे शबाब पर था, धार के जबरदस्त गर्म माहौल के बीच भोजशाला के बाहर सुलह की एक ठंडी बयार आई। इससे वसंत मुस्कुरा उठा। टकराव की तमाम आशंका और अटकलों के बीच पूजा और नमाज शांति से संपन्न हो गई। प्रशासन ने चैन की सांस ली और सरकार ने भी। एक तरफ अफसर गले मिले तो दूसरी तरफ यहां डेरा डाले प्रभारी मंत्री को मुख्यमंत्री ने वेलडन कहकर खुश कर दिया। शहर का माहौल भी तेजी से बदला। सुरक्षाबलों की रवानगी शुरू होने लगी। शाम को बाजार भी खुलते नजर आए। इस बीच एक इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थर उछालने की कोशिश की लेकिन उसे हवा न मिल सकी। यानी सब कुछ अच्छे से हो गया।
सुबह समूचे शहर के माहौल में बात बिगड़ने वाली आशंका फैली थी। गली, मोहल्ले, सड़क, चौराहों पर सुरक्षाबलों ने पोजीशन ले रखी थी। सूर्योदय के साथ ही भोज उत्सव समिति के सदस्य पूजा की सामग्री लेकर भोजशाला के भीतर गए तो बाउंसर और पुलिस जवान कुर्ते पायजामें में पूजा के लिए तैयार दिखे। सुलह पर जो बात रात को मुकाम पर नहीं पहुंच सकी थी, वह सुबह बनते-बनते फिर बिगड़ गई। सदस्य यह कहते हुए उलटे पैर लौट आए कि प्रशासन जूते-चप्पलों के साथ अपने कर्मचारियों से पूजा करवाकर हमारे साथ चालबाजी कर रहा है। गुस्साए सदस्यों ने इसी के साथ बाहर ज्योति अखंड मंदिर में पूजन और हवन शुरू कर दिया। पूरे शहर से हजारों लोगों ने ज्योति मंदिर में आहुति डाल प्रशासन और सरकार की चिंता बढ़ा दी। दोपहर एक बजे तक महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर तो पुरुष कंधो पर बैठाकर पूजन के लिए साथ लाए। युवतियों की संख्या भी कम नहीं थी और बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहे।
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19 लोगों ने पढ़ी नमाज
भोजशाला की छत पर टेंट में प्रशासन ने नमाज अदा करवाई। दोपहर 1 बजे से पहले जिन 19 लोगों ने नमाज पढ़ी उन्हें सुबह 4 बजे ही कमाल मौलाना की दरगाह पहुंचा दिया था। संभागायुक्त संजय दुबे ने कहा आदेश में 1 से 3 के मध्य नमाज की बात लिखी है। नमाज में दो घंटे नहीं लगते, इसलिए इसके बाद पूजन फिर शुरू कर दिया।
भोजशाला के अंदर पूजा और छत पर नमाज। फोटो : ओपी सोनी/मिलन पाल
लालबाग से निकली मां वाग्देवी की शोभायात्रा में लोगों ने उत्साह से भाग लिया। यह शोभायात्रा भोजशाला के प्रवेश द्वार पर संपन्न हुई।
सुबह की नाराजी दोपहर तक सुलह में बदली, उत्साह से मना उत्सव