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- जिस बस में बड़े भाई को बैठाकर जा रहा था, उसी ने बाइक सवार छोटे भाई को रौंदा, लोगों ने बस जलाई
जिस बस में बड़े भाई को बैठाकर जा रहा था, उसी ने बाइक सवार छोटे भाई को रौंदा, लोगों ने बस जलाई
धाररोड पर रविवार दोपहर तेज रफ्तार यात्री बस ने बाइक सवार युवक को रौंद दिया। युवक उसी बस में बड़े भाई को बैठाकर जा रहा था। घटना के बाद चालक ने बस रोकने के बजाय गाड़ी दौड़ा दी। लोगों ने 300 मीटर पीछा कर बस रुकवाई। गुस्साए लोगों ने बस में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। पथराव में चार यात्री भी घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शी सतीश पंचोली और रोहित चौहान ने बताया घटना दोपहर 2.15 बजे की है। इंदौर से धार की तरफ जा रही बस (एमपी-45 पी-0163) ने गधा टेकरी पर बाइक सवार युवक को कुचल दिया। बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और युवक की मौके पर ही मौत हो गई। चालक ने बस तेजी से दौड़ाई। क्षेत्र में हाट बाजार लगा था। इसमें आए लोगों ने बाइक से बस का पीछा किया। वहीं, बस में सवार लोगों ने भी ड्राइवर को बस रोकने का कहा, लेकिन वह नहीं रुका। 300 मीटर दूर लोगों ने बस के आगे गाड़ी लगा दी तब चालक ने बस रोकी। ड्राइवर बस से उतरा और खेत में दौड़ लगा दी। इस बीच कुछ लोगों ने बस पर पथराव शुरू कर दिया।
रास्ते में बात करते हुए जा रहे थे दोनों भाई
पत्थरसे घायल यात्रियों को पास की ही डिस्पेंसरी में मरहमपट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। एक यात्री ने बताया दोनों भाई बात कर रहे थे। महेंद्रू बस के बराबर गाड़ी चला रहा था, तभी हादसा हो गया।
जिला अस्पताल में जब महेंद्रू का शव पहुंचा तो परिवार के साथ उसके पिता दिलीप भी गए। वे बड़े बेटे सोलंकी को चाकू लेकर मारने दौड़े। पुलिस ने बीच-बचाव कर उन्हें अलग किया। सोलंकी को ही छोटे बेटे की मौत का कारण मान रहे थे। हालांकि पुलिस ने पिता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
बस में सवार यात्री जान बचाकर सामान उठाकर गिरते-पड़ते उतरे। पत्थर लगने से चार यात्री घायल हो गए। लोगों ने दौड़कर ड्राइवर शांतिलाल को पकड़ा और पीटना शुरू कर दिया। उधर, लोगों ने बस में आग लगा दी। करीब 10 मिनट में टीआई चंदन नगर विनोद दीक्षित मौके पर पहुंचे। उन्होंने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड पहुंची और तब आग बुझाई जा सकी।
बेटे को मारने दौड़े पिता
पत्थर लगने से चार यात्री घायल
सोलंकीसिंह
बाइक सवार युवक की पहचान 20 वर्षीय महेंद्रू पिता दिलीप निवासी अहिरखेड़ी के रूप में हुई। उसे बस में सवार बड़े बाई सोलंकीसिंह ने ही पहचाना। सोलंकी ने बताया महेंद्रू मुझे गंगवाल बस स्टैंड पर छोड़ने आया था। मैं ब