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डिजिटल इंडिया में कार्ड नहीं, नंबर से ही पहचान
{धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया . नईदिल्ली
डिजिटलइंडियामें आम लोगों की पहचान और योग्यता दोनों क्लाउड (ऑनलाइन स्टोरेज) पर होगी। इलेक्ट्रॉनिक कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी। सारे काम सिर्फ एक ही नंबर से होंगे। आधार नंबर इसका मूल है। सरकारी सहायता, सूचना, कार्यों और अन्य आवश्यकताओं के लिए सिर्फ आपकी पहचान का नंबर ही बताना काफी होगा। डिजिटल इंडिया के संयोजक मिनिस्ट्री ऑफ कम्युनिकेश और इफोरमेशन टेक्नॉलाजी (आईटी) के सचिव आरएस शर्मा ने विशेष बातचीत में बताया, यह लाॅन्ग टर्म प्रोजेक्ट है। लेकिन अगले पांच वर्ष में सभी लोग ऑनलाइन कनेक्ट होंगे और सरकार के पास सबका डाटा होगा। देश में सस्ते स्मार्ट फोन और लैपटॉप बनाने पर तेजी से काम हो रहा है। आने वाले समय में स्मार्ट फोन की कीमतें और नीचे आएंगी।
उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट पर शुरुआत में तीन लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकतर काम पीपीपी मोड पर कराने के लिए कई बड़ी आईटी कंपनियों से बातचीत हो रही है। वर्तमान में देश में एक लाख कॉमन सर्विस सेंटर हैं। àæðáÂðÁ%6 ÂÚ
जोअगले एक वर्ष में 2.5 लाख हो जाएंगे। इससे एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा। सभी पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर लाइन से जोड़ने की भी योजना है, जिससे कि सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हों। वर्तमान में देश करीब 100 बिलियन डॉलर (6.1 लाख करोड़) के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का आयात करता है। यही रफ्तार रही तो 2020 तक यह चार गुना हो जाएगा। लेकिन सरकार ने इस अवधि में इसे शून्य करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अभी आठ इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर में काम शुरू हो गया है।
यह पूछे जाने पर कि बिजली की कमी और अशिक्षा प्रोजेक्ट के लिए कितनी बड़ी चुनौती हैं, शर्मा ने कहा कि देश में साक्षरता करीब 70 फीसदी है और 90 करोड़ से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं। यानि कि जो साक्षर नहीं है वे भी मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं। इसी प्रकार सौर ऊर्जा बिजली की जगह इस्तेमाल होगी।
यह होगा फायदा
- सभी नागरिकों का यूनिक आईडेंटिटी कोड
- गांवों और शहरों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी।
- सभी विभागों की सूचनाएं ऑनलाइन मिलेंगी।
- सभी जगह मोबाइल कनेक्टिविटी।
- स्कूलों में ब्रॉड बैंड कनेक्टीविटी, वाई-फाई, ऑनलाइन कोर्स, स्कूली किताबों को ई-बुक्स में तब्दील करना।