पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जेएनयू में भारत विरोधी नारे, छात्र संघ अध्यक्ष गिरफ्तार

जेएनयू में भारत विरोधी नारे, छात्र संघ अध्यक्ष गिरफ्तार

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में भारत विरोधी नारेबाजी पर पुलिस ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसे जब मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया तो उन्होंने घटना का वीडियो देखने के बाद कन्हैया से पूछा, “किस तरह की आजादी चाहिए आपको?’ इसके बाद उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

कन्हैया को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन की कोर्ट में पेश किया गया था। यहां पुलिस ने बताया, छात्रों के एक ग्रुप ने 9 फरवरी को जेएनयू कैम्पस में कार्यक्रम रखा था। अफजल गुरु की 2013 में फांसी की याद में। इस दौरान भारत-विरोधी नारे लगे थे। शेष|पेज 5 पर











कार्यक्रम में पाकिस्तान, गुरु और 1984 में एक मर्डर केस में फांसी पर चढ़ाए गए मकबूल बट्ट के पक्ष में नारेबाजी हुई। कश्मीर को भारत से आजाद करने के नारे लगवाने वाले छात्रों को पहचानने के लिए कन्हैया से पूछताछ जरूरी है। कोर्ट को बताया गया कि पांच अन्य आरोपी उमर खालिद, अनंत प्रकाश, रमा नागा, आशुतोष और अनिर्बन फरार है। उनके ठिकाने भी कन्हैया बता सकता है। पुलिस कन्हैया से पूछताछ में उसके आतंकी संगठनों से लिंक तलाशने की भी कोशिश करेगी।



ऐसा लगता है कि इन्हें भारत में होने का दुख-मजिस्ट्रेट

कन्हैया ने कोर्ट में दावा किया कि न तो वह नारेबाजी में शामिल था, न ही आयोजक था। एबीवीपी छात्रों का आयोजकों से झगड़ा शुरू होने पर बीच-बचाव करने गया था। तब पुलिस ने दावा किया, ‘कन्हैया झूठ बोल रहा है। वह वीडियो फुटेज में है।’ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन ने वीडियो फुटेज देखते हुए कहा, “”ऐसा लगता है कि इन छात्रों को भारत में होने का दुख है।’’ मजिस्ट्रेट ने कन्हैया को वीडियो में देखा। पुलिस ने जेएनयू के सुरक्षा गार्ड संदीप कुमार के हवाले से कहा कि कन्हैया भी नारे लगा रहा था।

राजद्रोह का आरोप भी है :

जेएनयू के कार्यक्रम को लेकर दिल्ली में भाजपा सांसद महेश गिरि और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी। इसके बाद वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। आईपीसी की धारा-124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप हैं।

इस बार भाजपा ने लगाया आपातकाल-लेफ्ट :

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी से लेफ्ट पार्टियां भड़क गई है। कोलकाता में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, “”क्या आपको पता है कि नारे किसने लगाए? जब आप नहीं जानते तो सभी छात्र नेताओं को गिरफ्तार क्यों कर रहे हो? पुरुष पुलिसकर्मी लड़कियों के हॉस्टल में छापे मार रहे हैं। ऐसा सिर्फ आपातकाल में देखा था। देश में फिर इमरजेंसी लग गई है। इस बार भाजपा ने लगाई है।’’ भाकपा के महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी, राष्ट्रीय सचिव डी. राजा, माकपा पोलित ब्यूरो ने भी कन्हैया की गिरफ्तारी की निंदा की। साथ ही मोदी सरकार और आरएसएस को घेरा।

जेएनयू के छात्र, टीचर्स उतरे कन्हैया के समर्थन में

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी को लेकर कैम्पस में लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन हुए। छात्रों और टीचर्स ने कुलपति के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों की तुलना आतंकियों से करने पर प्रशासन से दखल देने की मांग की। नवनियुक्त कुलपति जगदीश कुमार ने कहा, “जेएनयू कैम्पस में फ्री डिबेट हो सकती है। लेकिन इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों के लिए नहीं करने देंगे।’ यूनिवर्सिटी में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन के सचिव विक्रमादित्य ने कहा, ‘यह अनुशासनात्मक मुद्दा हो सकता है। लेकिन राजद्रोह नहीं। छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।’

उधर, एबीवीपी सदस्यों ने आरोपी छात्रों को जेएनयू से निकालने के लिए इंडिया गेट तक विरोध मार्च किया। पुलिस ने करीब 90 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें संसद भवन पुलिस थाने ले गए।

कन्हैया

पाक जिंदाबाद कहने वालों की जबान क्यों न काट ली जाए : विजयवर्गीय

जेएनयू मामले पर भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ट्विटर पर लिखा, आज इलाहाबाद में एक पूर्व सैनिक ने मुझसे सवाल किया। वह सवाल जो हर राष्ट्रभक्त को सता रहा है। प्रश्न था- हम सैनिक सीमा पर प्राणों की बाजी क्या इसलिए लगाते हैं कि देश के अंदर लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाएं और कोई कुछ न कहे? भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों की जुबान क्यों नहीं काट दी जाती? मुझे लगा कि उन पूर्व सैनिक के मुंह से आज हर राष्ट्रभक्त बोल रहा है।



लेकिन सवाल यह है कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने वाले भारत जैसे देश में क्या यह संभव है?’

खबरें और भी हैं...