एक नाम थार एक्सप्र
एक बार 25 अक्टूबर 2014 को थार लिंक एक्सप्रेस कराची केंट से रवाना हुई। रास्ते में मीरपुर खास व हैदराबाद के बीच 211 बेटिकट यात्री चढ़ गए। खोखरापार में जांच हुई तो इन्हें उतारा गया। वीजा-पासपोर्ट तक नहीं था इनके पास। सुरक्षा एजेंसियों ने आपत्ति जताई तो पाकिस्तान रेलवे के 10 कर्मचारी इस मामले में सस्पेंड हुए थे। -पाकिस्तानी यात्री हैदराबाद के जमील तथा सांगड़ क्षेत्र के विस्थापित मोहन से बातचीत के आधार पर
एक नाम थार एक्सप्रेस। दो ट्रेनें। एक हमारी जो जोधपुर से मुनाबाव तक चलती है। दूसरी पाकिस्तान की जो कराची से खोखरापार (जैसलमेर बॉर्डर से लगी पाक सीमा में अंतिम स्टेशन) तक आती है। भारत-पाकिस्तान रिश्तों के नाम पर चली इस ट्रेन के संचालन को 18 फरवरी को 10 साल पूरे हो रहे हैं। लेकिन, दोनों ट्रेनों की व्यवस्थाओं में जमीन-आसमान का फर्क है। जोधपुर से चलने वाली ट्रेन में एक-एक आदमी की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना जाता है। बिना टिकट, जांच, पासपोर्ट, वीडियोग्राफी और वीसा के ट्रेन पर चढ़ना तो दूर, ट्रेन को देखना भी संभव नहीं है। जबकि, पाकिस्तान में चलने वाली ट्रेन में बिना टिकट यात्री तक पकड़े जा चुके हैं।
थार एक्सप्रेस से हर साल भारत आने वाले अब्दुल वहीद ने बताया कि दो साल पहले तो एक बार पाक से आने वाली थार एक्सप्रेस का रास्ते में ही डीजल खत्म हो गया था। 10 साल से जोधपुर से हर सप्ताह चलने वाली गाड़ी नॉन स्टॉप मुनाबाव पहुंचाती है। बीच में कहीं नहीं रुकती। उधर, पाकिस्तान में चलने वाली थार एक्सप्रेस ट्रेन बीच में दो स्टेशन पर रुकती है। इस दौरान कोई भी ट्रेन में चढ़ता-उतरता रहता है। इस बात की ढंग से जांच भी नहीं होती।
 थार एक्सप्रेस : एक अंतरराष्ट्रीय ट्रैक, दो ट्रेनें, दोनों अपने देश की दशा और दिशा की तस्वीर पेश करती हैं
रास्ते में खत्म हो जाता है पाकिस्तानी ट्रेन का डीजल