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स्टेम सेल से भी हार्ट पेशेंट का कारगर इलाज

6 वर्ष पहले
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दिलके मरीजों के इलाज में स्टेम सेल पद्धति कारगर साबित हो रही है। फेस-1 ट्रायल किया जा चुका है, जिसमें 100 मरीजों को शामिल किया था। इसमें यह देखा कि जिन मरीजों में बायपास के साथ स्टेमसेल का प्रत्यारोपण किया गया, उनकी सेहत में 30 प्रतिशत सुधार आया है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया भी स्टडी को मंजूर कर चुका है। हालांकि यह प्रयोगात्मक स्तर पर है। हमारी योजना है फेस-3 ट्रायल किया जाए। यह बात मेदांता मेडिसिटी ग्रुप के चेयरमैन और प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान ने भास्कर से चर्चा में कही।

इंदौर आए डॉ. त्रेहान ने देश में दिल के मरीजों की बढ़ती तादाद पर चिंता जताई। डॉ. त्रेहान ने यह भी कहा कि ईमानदारी से डॉक्टर अपना काम करें तो मरीज दरवाजा तोड़कर अंदर आते हैं। अपने 47 साल के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि केवल खानपान ही नहीं, बल्कि अनुवांशिक कारण भी मरीजोंकी संख्या बढ़ा रहे हैं। कार्डियक स्टेम सेल तकनीक के नतीजे अच्छे मिले हैं। हार्ट अटैक के बाद मांसपेशियां नष्ट या मृतप्राय: होने लगती हैं। प्रयोग के तौर पर इंट्रोग्रेट इन्फ्यूजन तकनीक से स्टेम सेल प्रत्यारोपित किया गया है।

देश में 40 साल में ही बायपास

डॉ.त्रेहानने कहा सामान्य रूप से विश्व में 50 साल के बाद लोगों को बायपास करवाने की जरूरत पड़ती है लेकिन भारत में 40 साल में ही ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉ. त्रेहान सरकार की एडवायजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं। उन्होंने बताया स्वास्थ्य मंत्रालय को दो प्रस्ताव भेजे हैं जिनमें बीपीएल परिवारों के लिए इलाज की राशि की सीमा 30 से बढ़ाकर 60 हजार करना है। दूसरा प्रोजेक्ट हर परिवार को 2 लाख की मेडिक्लेम पॉलिसी देना है, जिसमें सात बड़े ऑपरेशन कवर होंगे।