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स्मार्ट क्लास में दरवाजे-खिड़कियां बने ब्लैक बोर्ड

7 वर्ष पहले
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कभीकिसी स्कूल के ब्लैक बोर्ड पर भी ताला लगता है। सुनकर आश्चर्य होगा, लेकिन नागदा के शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में ऐसा हो रहा है। स्कूल में संसाधनों कक्षों का अभाव होने पर यहां के व्यवस्थापकों ने कक्षाओं के दरवाजे और खिड़की को ही ब्लैक बोर्ड का रूप देकर बच्चों को पढ़ाने की जुगाड़ कर ली। शिक्षकों की सूझबूझ काबिल-ए-तारीफ है। संसाधनों की कमी की शिकायत की बजाए, शिक्षक बच्चों की पढ़ाई सतत जारी रखे हुए है। ब्लैक बोर्ड बने दरवाजों पर लगे ताले शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दिखाने के लिए काफी हैं।

भास्कर की यह खबर मुख्यमंत्री की इसी वर्ष से शुरू की गई स्मार्ट क्लास रूम योजना पर भी सवाल है। योजना के तहत मुख्यमंत्री की मंशा माध्यमिक स्कूलों में डिजिटल शिक्षा पद्घति (एलईडी, लेपटॉप अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सहायता से ऑडियो विजुअल पद्धति से शिक्षा) यानी खेल-खेल में बच्चों को शिक्षा देना है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूलों में ब्लैक बोर्ड अन्य आवश्यक संसाधनों का ही अभाव है। विद्यार्थियों की संख्या के मान से पर्याप्त कक्ष नहीं है और शिक्षकों की कमी होने की सच्चाई तो जगजाहिर है ही। ऐसे में स्मार्ट क्लास की योजना सचमुच कोई सार्थक सुधार ला पाएगी, इसमें संदेह है।

पहले ही भवन नहीं, स्मार्ट क्लास के लिए घेर लिया कक्ष

स्कूलके प्रभारी प्राचार्य अशोक शर्मा के अनुसार शहर में शासकीय बालक कन्या माध्यमिक विद्यालय में 1-1 स्मार्ट क्लास रूम के लिए कक्ष अधिकृत किए गए हैं। डिजिटल तकनीक से पढ़ाई के लिए संसाधन तो गए हैं, लेकिन डिजिटल पाठ्य सामग्री अब तक नहीं आई है। इसलिए इस पर ताला लगाना पड़ा है। दूसरी ओर कन्या मावि में छात्राओं की संख्या 466 के मान से पहले से ही कक्ष का अभाव है। स्मार्ट क्लास रूम पर फिलहाल ताला है। ऐसी स्थिति में सैकड़ों छात्राओं को बरामदे में विपरीत दिशा में बैठाकर अलग-अलग कक्षाएं लगाना पड़ रही है।

^स्मार्ट क्लास पर जो ताला लगा है, वह गलत है। हो सकता है ताला सुरक्षा की दृष्टि से लगाया होगा। वैसे जब तक पर्याप्त साधन नहीं आते, तब तक तकनीकी संसाधनों का ध्यान रखते हुए उस कक्ष में बैठाकर भी पढ़ाई करवाई जा सकती है। पर्याप्त बजट के बावजूद दरवाजे-खिड़कियों का उपयोग ब्लैक बोर्ड के रूप में करना गलत है। मामले में जांच की जाएगी। -अशोकवाड़िया, बीआरसी,नागदा-खाचरौद