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संस्कारवान संतान ही सबसे बड़ी पूंजी है

4 वर्ष पहले
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भगवान अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए धरती पर जन्म लेते हैं। भागवत कथा जिसने सुनाई और जिसने सुनी दोनों का ही कल्याण होता है। राजा परीक्षित ने गर्भ में ही श्रीमद् भागवत कथा सुनी थी। सृष्टि में जल ही जल था। भगवान ने 12 अवतार धारण कर इस धरती से पापियों का नाश किया था। संस्कारवान संतान ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यह बात परिक्रमावासीधाम पर चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को पंडित शैलू शर्मा ने श्रद्धालुओं से कहीं।

अागे कहा आज जब दुष्कर्मों की आंधी चल रही है ऐसे में धन नाम और वैभव कमाना आसान है। अपनी संतान को योग्य एवं संस्कारवान बनाना मुश्किल है। जिन लोगों के भाग्य में सुसंस्कारित योग्य संतान आती है उनसे बड़ा धनवान दुनिया में कोई नहीं है। इसीलिए प्रेम और परवरिश की ताकत लगाकर ध्रुव, प्रह्लाद और राम जैसी संतान की आंख खुलने से लेकर अपनी आंख बंद होने तक उसे संस्कारित बनाने का प्रयास करें। श्रीमद् भागवत कथा भी यही संदेश देती है। कथा के पूर्व सुबह कार्यक्रम स्थल पर भगवान शिव, श्रीकृष्ण और हनुमानजी का अभिषेक किया। पंडित, साधु-संतों ने दूध, दही, शहद शक्कर और पंचामृत से अभिषेक कर महामृत्युंजय पाठ कर हवन किया। आयोजनकर्ता अनिल तिवारी व प|ी सविता तिवारी ने हवन में आहुति दी। रंजना तिवारी, पुष्पा तिवारी ने भागवत कथा की पोथी का पूजन कर कथावाचक काे तिलक लगाया। शाम को समापन पर महाआरती कर प्रसाद बांटा। रात्रि में बालिकाओं ने गरबों की प्रस्तुति दी। झूले, फिसलपट्टी भी लगने से बच्चों का भी मनोरंजन हो रहा। प्रतिदिन रात्रि में सुंदरकांड, भजन संध्या हो रहीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंच रहे।

मांडू. भागवत कथा के दौरान पोथी का पूजन भी किया गया।

भागवत कथा
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