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‘समग्र विकास के सूत्र स्नेह, सहयोग और समर्पण’

6 वर्ष पहले
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धार | समग्रविकास के तीन सूत्र स्नेह, सहयोग और समर्पण आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है। बीज मिटता है, तो वृक्ष बनता है, जो पुन: कई फलों और बीजों को देने वाला हो जाता है। इस तरह समर्पण और विसर्जन, नव निर्माण और उपलब्धियों के प्रतीक बन जाते हैं, लेकिन यह सब एक लंबी यात्रा के बाद परिणाम में बदलता है। इस यात्रा पर धीरजता से चलने वाले बिरले ही होते हैं। यह बात साध्वी प्रीतिदर्शनाश्रीजी ने बड़ा रावला स्थित राजेंद्र भवन ने प्रवचन में कही। वे रोजाना सुबह 9.30 बजे से प्रवचन दे रही हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रविवार को गुरु गुणानुवाद विषय पर प्रवचन दिए। आयोजक श्वेतांबर जैन श्रीसंघ है। जानकारी राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद शाखा धार अध्यक्ष सुरेशचंद्र भंडारी ने दी।