जर्मन पर्यटक बना साधु नाम रखा शांति
मांडू | पर्यटननगरी में विशेष विदेशी मेहमान इन दिनों आकर्षण बना है। ये हैं जर्मनी के माइकल। 1982 में भारत भ्रमण के दौरान चित्रकूट में साधु संतों को देख उनकी तरह वेशभूषा धारण कर ली। तब से इसी तरह साधु के भेष में रहते हैं। जर्मनी से भारत आना जाना करते हंै। माइकल ने अपना नाम शांति रख लिया है। कोई पूछता है तो उन्हें शांति नाम बताते हैं। हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, रामायण, राम रक्षा स्त्रोत, शिव स्त्रोत, दुर्गा सप्तशती का वह दिन में तीन बार 45-45 मिनट बदल-बदल कर पाठ करते हैं। अंग्रेजी के माध्यम से प्रतिदिन जर्मन भाषा में लिखकर इन सूत्रों को बोलते हुए प्रार्थना करते हैं। माइकल को पांच भाषाओं का ज्ञान है। योगा को बड़ा ही रामबाण इलाज समझते हैं। माइकल को 13 वर्षों से ज्योतिष का भी ज्ञान है। हाथ देखकर उसके बारे में भविष्यवाणी करते हैं। उन्होंने चप्पल पहनना छोड़ दी है। नंगे पैर नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं। पीपल की पूजा को बड़ा महत्व देते हैं। हरिद्वार, वाराणासी, पावागढ़, चित्रकूट, इलाहाबाद, खजुराहो, सांची, ओंकारेश्वर, महेश्वर, अमरनाथ, गयाजी और भी कई तीर्थ स्थलों पर जा चुके हंै। वे हिंदी संस्कृत भी कुछ-कुछ सीख गए हैं।