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सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास से मिलेगी सफलता

6 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | आलीराजपुर

खुश रहना एक कला है और एक सफल व्यक्ति ही इस राज को जान सकता है कि खुशी में कितनी सफलता समाहित रहती है। सफलता का आधार है मन की खुशी, सकारात्मक सोच व निरंतर प्रयास। जीवन में वो ही व्यक्ति असफल होते हैं जो सोचते ज्यादा हैं पर करते नहीं। ज्यादा सोचने से हमारी मन की आंतरिक शक्तियां कमजोर होने लगती हैं। फलस्वरूप बुद्धि व याददाश्त शक्ति क्षीण हो जाती है और कुछ पढ़ा हुआ समय पर याद नहीं आता। अच्छी सफलता के लिए खुश होकर कार्य करने से पढ़ाई के दौरान खुशी व सफलता दोनों ही मिलेगी। लेकिन खुशी के लिए काम करोगे तो खुशी नहीं मिलेगी। यह बात राजयोगी ब्रह्मकुमार नारायण भाई ने सर प्रताप उत्कृष्ट उमावि में विद्यार्थियों से कही।

उन्होंने कहा युवा इंटरनेट, कम्प्यूटर, मोबाइल का अनावश्यक प्रयोग कर रहे हैं इससे एकाग्रता खत्म होती जा रही है। देर रात तक इनके उपयोग से हमारे मस्तिष्क व स्वास्थ पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क की शक्तियां अक्रियाशील होने लगती हैं। छात्र की रुचि पढ़ाई में कम होती है तथा वह पढ़ाई को बोझ महसूस करने लगता है। हल्के मन से पढ़ने से हमारे मस्तिष्क की सोई हुई शक्तियां जागृत होने लगती हैं और छात्र मेधावी व ऊर्जावान बन जाता है। प्रातःकाल सोकर उठते ही 15 मिनिट का ध्यान मन की एकाग्रता को बढ़ा देता है। एक घंटे की पढ़ाई 15 मिनिट में पूरी कर लेता है। एक असफल व्यक्ति का निराश होना स्वाभाविक है। सदा याद रखें विफलता में सफलता के बीज समाए रहते हैं।

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मकुमार नारायण भाई व माधुरी बहन ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण द्वारा किया। विद्यालय के प्राचार्य संजय परवाल, शिक्षक नरोत्तम मेहता, जगदीशचंद्र शाह, दयालसिंह चौहान, शोभा भावसार व सुशीला सेमलिया ने अतिथियों का स्वागत किया। पश्चात परवाल ने स्वागत भाषण दिया तथा माधुरी बहन ने संस्था परिचय दिया। संचालन विश्वजीतसिंह तंवर ने किया। आभार अंजू सिसौदिया ने माना।

सर प्रताप उमावि में हुए कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थी और स्टाफ।

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