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अब विद्यार्थियों को एक ही प्रमाण-पत्र में मिलेगी हिंदी और अंग्रेजी की डिग्री

4 वर्ष पहले
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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इसी साल से एक अक्टूबर से डिग्री का फॉर्मेट बदलने जा रही है। इसके तहत विद्यार्थियों को एक ही प्रमाण-पत्र में हिंदी और अंग्रेजी दोनों की डिग्री मिलेगी। अभी यह डिग्री अलग-अलग मिलती है, जिससे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कतें उन विद्यार्थियों को आती हैं, जिन्हें जॉब या अागे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना हाेता है। यूनिवर्सिटी की कमेटी ने डिग्री का फॉर्मेट बदलने को हरी झंडी दे दी है। कार्यपरिषद की इसी माह होने वाली बैठक में इसे स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद टैंडर प्रक्रिया होगी, जिसमें अधिकतम 30 दिन का समय लगेगा। एक माह नई डिग्री तैयार करने और अन्य प्रक्रिया में लगेगा और नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।

छात्रों को यह होगा फायदा
हिंदी और अंग्रेजी की डिग्री के लिए अलग-अलग आवेदन करने का झंझट खत्म होगा।

अलग-अलग दो प्रमाण-पत्र संभालना नहीं पड़ेंगे।

डिग्री का दुरूपयोग होने की अांशका नहीं रहेगी।

छात्रों को भी शुल्क में 100 रुपए बचत होगी क्योंकि, दोनों भाषा की डिग्री के 200-200 रुपए देना पड़ते हैं, अब 300 लगेंगे।

यूनिवर्सिटी के सिस्टम पर क्या असर?
एक ही छात्र की दो अलग-अलग डिग्री तैयार नहीं करना पड़ेगी। कागज की भी बचत होगी।

एक ही छात्र की डिग्री दो बार डाक से नहीं भेजना होगी। कोरियर भेजने का लोड 50 फीसदी तक कम हो जाएगा।

गुणवत्ता सुधार के चलते स्टोर रूम में डिग्री फटने या खराब होने का डर नहीं होगा।

कार्यपरिषद में देंगे स्वीकृति
1 अक्टूबर से हिंदी-अंग्रेजी की डिग्री एक साथ देंगे। कमेटी ने निर्णय के बाद अब कार्यपरिषद की बैठक में स्वीकृति देंगे। 15 सितंबर तक सारी प्रक्रिया पूरी कर अक्टूबर से जो भी डिग्री भेजेंगे, वह नए फॉर्मेट में ही रहेगी। -डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति, डीएवीवी

400 के बजाय लगेगा सिर्फ 300 रुपए शुल्क
यूनिवर्सिटी डिग्री के लिए अभी जो कागज इस्तेमाल करती है, वह बेहद पतला और सामान्य गुणवत्ता का है। लेकिन नए डिग्री फॉर्मेट में जो कागज लिया जाएगा, वह कई गुना अच्छा और ज्यादा मजबूत होगा, बल्कि बारिश में भी खराब नहीं होगा। इसमें सिक्यूरिटी फीचर्स भी जोड़े जाएंगे ताकि कोई फर्जी डिग्री बना सके। अभी यूनिवर्सिटी हिंदी और अंग्रेजी की डिग्री के 200-200 रुपए फीस लेती है। लेकिन नए फॉर्मेट में एक ही प्रमाण-पत्र मिलेगा इसलिए 300 रुपए तय होंगे। इससे छात्रों को भी सौ रुपए बचत होगी। उप कुलसचिव (परीक्षा) प्रज्चवल खरे का कहना है कि कमेटी ने डिग्री का फॉर्मेट बदलने का निर्णय ले लिया है। अब आगे की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।

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