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डूब क्षेत्र के लोगों को जिन अस्थायी शेड में रखना है, 15 तक वे ही तैयार नहीं

4 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | धार/निसरपुर

विस्थापन की पहली चेतावनी 15 जुलाई शनिवार को आ गई लेकिन प्रशासन अस्थायी शेड ही नहीं बनवा सका है। जबकि उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार गांव खाली नहीं करने पर लोगों को बलपूर्वक हटाकर यहां रखना है। शासन की ओर दिए विशेष पैकेज का लाभ देने के पूर्व प्रशासन वचन-पत्र भरवा रहा है। उसमें 15 जुलाई तक गांव खाली करने की बात है। यह पहली चेतावनी अवधि थी लेकिन गिनती के परिवार शिफ्ट हुए हैं। अब 31 जुलाई का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तारीख तक विस्थापन की डेडलाइन रखी है। डूब प्रभावित भी हटने काे तैयार नहीं दिख रहे। एक आेर क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। दूसरी ओर शुक्रवार सुबह 11 बजे नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले डूब प्रभावितों ने कोटेश्वर तीर्थ पर एक घंटे सत्याग्रह कर सरकार को चेतावनी दी कि हमारी मांगें नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन जलसत्याग्रह करेंगे। यहां की गंगाबाई ने कहा संविधान में है कि बारिश में किराएदार से मकान खाली नहीं करवाए जा सकता है।

प्रशासन का दावा : डूब प्रभावित तेजी से बना रहे अपना आश्रय
कलेक्टर श्रीमन शुक्ला का कहना है पुर्नवास स्थलों पर सुविधाएं पूर्ण करने का काम प्राथमिकता से करवा रहे हैं। कड़माल, खापरखेड़ा व बांदड़ीखेडा के लगभग 35 से 40 परिवारों ने अपने भवन बनाने शुरू किए हैं। पुनर्वास स्थल पर कई परिवारों ने रहने भी लगे हैं।

बाढ़ राहत के इंतजाम भी नहीं
नर्मदा बचाओ आंदोलन के सुरेश प्रधान ने बताया बाढ़ वाले क्षेत्रों के पास सूचना बोर्ड, लाइफबोट, लाइफ जैकेट के साथ प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती होनी चाहिए। यहां ऐसा कुछ नहीं दिख रहा। निसरपुर विकासखंड सहित लगे कोटेश्वर, कोठड़ा, करोंदिया, मोलखड़, डेहर, चिखल्दा, गेहलगांव, कड़माल, पंचायतों के आंकड़ों के मुताबिक 20 हजार से ज्यादा परिवार अभी भी अपना बसेरा बनाए हुए हैं।

निसरपुर. रहवासियों ने एक घंटे तक जल सत्याग्रह किया।

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