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करीना और सैफ अली खान का सुपुत्र तैमूर

5 वर्ष पहले
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करीना कपूर और सैफ अली खान ने अपने शिशु का नाम तैमूर अली खान पटौदी रखा है। इतिहास में तैमूरलंग हृदयहीन लुटेरा था, जिसने भारत पर आक्रमण किया था। उन्हें आज इस बात का अहसास ही नहीं है कि यह नाम उस अबोध को ताउम्र तंग कर सकता है। जब पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल का नाम गजनी रखा तो वे यह भूल गए कि जब गज़नी ने पहले उस जगह तांडव किया, जिसे अब पाकिस्तान कहा जाता है गोयाकि अपनी ही जमीन को रौंदने वाले के नाम पर अपने शस्त्र का नाम रखा! इतिहास के ज्ञान का अभाव भी जुल्म ढाता है। भारत में इतिहास की किताबें भी संदिग्ध हैं, क्योंकि वे विदेशियों ने अपने पूर्वग्रह के साथ लिखी है। मौजूदा सरकार अपने हिंदुत्व के एजेंडे के अनुरूप इतिहास लिखवाना चाहती है।

विद्वानों का मत है कि टॉयनबी द्वारा लिखा इतिहास पूर्वग्रह मुक्त है। मुगल बादशाह दरबारी लेखकों से इतिहास लिखवाते थे और बाबरनामा या अकबरनामा ऐसी ही किताबें हैं। भारत प्राय: इस क्षेत्र के प्रति उदासीन रहा है और अपने पुराने आख्यानों को इतिहास का दर्जा देने की भूल भी हुई है। इतिहास बोध कभी हमें स्पर्श भी नहीं करता। आम आदमी की सोच में भी विगत छाया होता है या भविष्य की आशंका उसे परेशान करती है और इसी चक्कर में वर्तमान क्षण हाथ से निकल जाता है। भविष्य के प्रति हम जागरूक ही नहीं हैं। कुछ वर्ष पूर्व ही हुड़दंगियों ने पुणे के वाचनालय को नष्ट कर दिया, क्योंकि उन्होंने इस अफवाह पर यकीन कर लिया कि वाचनालय की एक किताब में शिवाजी के खिलाफ बातें लिखी गई हैं। हम आदतन सामने प्रस्तुत सत्य को अनदेखा कर देते हैं। संभवत: सत्य के प्रति हमारा आग्रह भी दिखावा है। सरकारी भवनों पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा होता है परंतु हम गल्प को ही सत्य मानते हैं।

भारत में कुछ लोगों ने अपने पुत्रों को हिटलर का नाम दिया है और इसे वे राष्ट्रप्रेम मानते हैं, क्योंकि हिटलर ब्रिटेन का शत्रु देश था। इस तरह की बातें भी लोकप्रिय है कि शत्रु का शत्रु हमारा मित्र है। भारत और पाकिस्तान के सामूहिक अवचतेन मंे परस्पर दुश्मन होने की बात इस ढंग से बिठा दी गई है कि चीन के हाथों एक बार बेहद पिटने के बावजूद हम भविष्य में चीन से खतरे को अनदेखा ही कर रहे हैं। पश्चिम की यह मंशा है कि कभी तीसरा विश्वयुद्ध हो जाए तो वह एशिया की जमीन पर लड़ा जाना चाहिए। पहले दो विश्वयुद्ध यूरोप की जमीन पर लड़े गए और अब वह युद्ध के नाम से ही कांपने लगता है। विश्व राजनीति की शतरंज पर बाजी इस तरह खेली जा रही है कि भारत, पाकिस्तान और चीन ही आपस में टकराएं और अमेरिका दूर बैठा इस अलाव से हाथ गरमाता रहे।

शेक्सपीयर ने किसी अन्य संदर्भ में कहा था कि नाम में क्या रखा है। गुलाब तो खुशबू ही देगा चाहे आप उसे बबूल के नाम से पूकारें परंतु नामकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह बार-बार पुकारा और सुना जाता है। ध्वनि तरंगे शरीर के साथ विचार प्रक्रिया को भी प्रभावित करती हैं। जब फौजें किसी पुल को पार करती हैं तब उन्हें निर्देश होता है कि कदमताल के अनुशासन से मुक्त होकर थोड़ा बेतरतीब चलें, क्योंकि सामूहिक कदमताल की ध्वनि की शक्ति के कारण ही भारत में सस्वर प्रार्थना की जाती है, जबकि अन्य धर्मों में प्रार्थना नि:शब्द होती है और खामोशी का पालन करना होता है। बहरहाल, करीना-सैफ को स्वतंत्रता है कि वे अपने शिशु का नाम हृदयहीन तैमूरलंग पर रखे पर बड़ा होकर यह बच्चा अपना नया नाम खुद चुन सकता है। यह आशंका है कि वह उस कालखंड में जवान होगा, जिसमें घरेलू अतिवादी शासन करेंगे और नाम के आधार पर भी दंड दिया जा सकेगा।

परदे के पीछे
जयप्रकाश चौकसे

फिल्म समीक्षक

jpchoukse@dbcorp.in

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