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सूदखोरों का रोज का 5,500 रु. ब्याज नहीं चुका पाया शिक्षक, स्कूल में लगा ली फांसी

5 वर्ष पहले
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डही के पास घाणा गांव में दो सूदखोरों के रोज के 5500 रुपए ब्याज से तंग सहायक शिक्षक गजेंद्रसिंह चोंगड़ (50) ने मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय में फांसी लगा ली। शिक्षक का मासिक वेतन 51,930 रुपए था, लेकिन सूदखोरी में ऐसे उलझे कि 5 लाख का कर्ज नहीं चुका सके।

पुलिस को जांच के दौरान शिक्षक की जेब से एक पत्र की कार्बन कॉपी मिली। यह पत्र उन्होंने एसपी को कोरियर किया था, जिसमें अपनी परेशानी लिखी थी। पुलिस ने इसे सुसाइड नोट मान इसमें लिखे दोनों सूदखोरों डही के जयंत मालवीया निवासी और कुक्षी के दिनेश बाबूलाल काकड़िया को आरोपी बनाया है। जयंत की 12 बसें चलती हैं। दिनेश ब्याज का काम करता है, जिससे उसने कुक्षी में बंगला बना रखा है। पुलिस ने दिनेश को गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे बड़वानी जेल भेज दिया गया। दूसरे आरोपी जयंत की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शिक्षक के परिजन ने पुराना बस स्टैंड पर एक घंटे चक्काजाम किया।

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शिक्षक ने एसपी को भेजे पत्र में लिखा- मैंने जयंत मालवीया से 4 लाख रुपए 4 प्रतिशत के हिसाब से लिए थे, जो फरवरी 2016 में मय ब्याज के आईसीआईसीआई बैंक से लोन लेकर दे दिए। फिर भी वह 4 हजार रुपए रोज का ब्याज बताकर मेरे चेक व स्टाम्प वापस नहीं दे रहा। दिनेश काकड़िया से 1 लाख रुपए 9 प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। दो माह पूर्व मय ब्याज के मैं लौटा चुका हूं। बावजूद वह 1500 रुपए रोज का ब्याज बताकर पैसे मांग रहा है और चेक व स्टाम्प नहीं लौटा रहा। इन लोगों ने अन्य लोगों के चेक व स्टाम्प से कोर्ट में केस लगाए हैं। मुझे भी धमकी दे रहे हैं। अभी नोटबंदी चल रही है, पैसा कहां से लाकर दूं, यह कहा तो कह रहे हैं कि इकट्ठे करके पैसे दें। नहीं तो कोर्ट में केस लगा देंगे।

गजेंद्रसिंह चोंगड़

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