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अब छात्र संख्या का आैसत निकालकर प्रोफेसर्स की पोस्टिंग करेगी सरकार
नए पदों की जरूरत नहीं होगी, जितने हैं उसी में चल जाएगा काम
भास्करन्यूज | भोपाल
बड़े-बड़ेशहरों के कॉलेजों में बरसों से जमें सरप्लस प्रोफेसरों को हटाने की तैयारी है। इसके लिए पहली बार ऐसा फार्मूला बनाया गया है, जिसके आधार पर ही अब कॉलेजों में प्रोफेसरों की पोस्टिंग होगी। उदाहरण के लिए उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी कॉलेजों में विषयवार छात्रों की कुल संख्या के आधार पर यह पता लगाएगी कि एक प्रोफेसर्स पर कितने छात्र हैं। यह औसत निकलने के बाद इस फार्मूले कॉलेजवार लागू कर दिया जाएगा।
अभी कई विषयों में ऐसी स्थिति है कि छात्र संख्या तो शून्य है, जबकि प्राध्यापक उपलब्ध है। कहीं 283 छात्रों पर एक ही प्राध्यापक है। नए फार्मूले के आधार पर जिस कॉलेज में भी जरूरत से ज्यादा प्राध्यापक होंगे उनका तबादला कर दिया जाएगा। या फिर अतिरिक्त पदों को दूसरे विषयों में समायोजित कर दिया जाएगा। राज्य सरकार इसे युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही बता रही है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस समय प्रदेश में तीन हजार से अधिक प्रोफेसर्स की कमी है। यदि अधिकतम 100 छात्रों पर भी एक प्राध्यापक मानें तो तीन लाख छात्र प्रभावित हो रहे हैं। नए पद तत्काल सृजित नहीं हो सकते। साथ ही रिक्त पद भरने की कार्यवाही में भी वक्त लगेगा। इसलिए विभाग नए फार्मूले पर अमल करने जा रहा है।
ऐसे समझें फार्मूला
इससमय प्रदेश में गणित के कुल 52 हजार 167 छात्र हैं। इनको पढ़ाने के लिए स्वीकृत पद 415 हैं, जिसमें से रिक्त पदों की संख्या 172 है। कुल छात्रों में प्राध्यापक के स्वीकृत पद से भाग देने पर प्रति प्राध्यापक औसत 126 छात्र निकलता है। इसी छात्र संख्या के फार्मूले को सभी कॉलेजों पर लागू किया जाएगा। अब यदि किसी कॉलेज में गणित के 200 छात्र हैं और प्राध्यापक चार तो वहां दो सरप्लस श्रेणी में जाएंगे।
^हरविद्यार्थी को गुणवत्ता के आधार पर शिक्षा मिले। इसीलिए यह प्रयास कर रहे हैं कि छात्रों की क्षमता के अनुसार हर कॉलेज में प्राध्यापक उपलब्ध हो जाए। प्रारंभिक गुणा-भाग में ही विषयों के आधार पर 335 प्रोफेसर सरप्लस होने के संकेत मिल रहे हैं। इनका युक्तियुक्तकरण करेंगे।’ -उमाशंकर गुप्ता, उच्चएवं तकनीकी शिक्षामंत्री