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धर्म : आत्मा का परमात्मा से होता है संबंध: शास्त्री

4 वर्ष पहले
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गंजबासौदा| लौकिक सुखों के पीछे भागने से अशांति होती है। संसार से प्रेम करें या नफरत दोनों में बंधन होगा। प्रभु भक्त वही होता है जो संसार को कृष्णमय देखता है। जिस तरह से संसार व शरीर का संबंध है उसी प्रकार आत्मा का परमात्मा से संबंध होता है। इसलिए शरीर से संसार की सेवा व मन से भगवान की सेवा करना चाहिए। यह बात नौलखी मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पंडित केशव गुरु शास्त्री ने कही। श्री शास्त्री जी ने कहा कि तीन भागवत नारियां है कुंती, द्रोपदी, उत्तरा। कुंती ने विपत्ति मांगी शिकायत नही की। द्रोपदी ने पांच पुत्रों की हत्या करने वाले अश्वत्थामा को क्षमा दान दिया। उत्तरा ने गर्भस्थ शिशु की रक्षा के लिए स्वयं की मृत्यु की बात कही। जिसके चलते उन्हें भागवत नारी कहा। इसी प्रकार भीष्म पितामह, विदुर, परीक्षित परम भागवत है। तीनों को भगवान श्री कृष्ण ने दर्शन दिए। दर्शन भी दो प्रकार के होते हैं। आवरण व निआवरण। संसार के विषयों में बंधे मनुष्यों को आवरणबद्ध भगवान दिखते हैं लेकिन मनुष्य उनकी पहचान नही कर पाते। दुर्योधन की सभा में भीष्म ने भगवान के दर्शन किए जबकि दुर्योधन भगवान को सिर्फ अपना संबंधी मानता रहा। माया का आवरण हटने के बाद भी निआवरण परमात्मा के दर्शन होते हैं।

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