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भावना के अनुरूप मिलते हैं भगवान: पं. प्रमेहानंद

6 वर्ष पहले
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गंजबासौदा| भावनाके अनुरूप हमें भगवान मिलते हैं। यह बात पंडित प्रमेहानंद महाराज ने बसरिया में भागवत कथा के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि श्री हरि विष्णु जब वामन अवतार में आए तब उनको बालक रूप में देख राजा बलि की बहन र|माला ने सोचा काश ऐसा मेरा पुत्र होता तो उसे में स्तनपान कराती। कृष्ण अवतार में वही र|माला पूतना राक्षसी बनी। उसने स्तन में जहर लगाकर भगवान को दूध के बहाने विषपान कराना चाहा तो भगवान ने उसकी भावना अनुरूप पूर्व जन्म की इच्छा तो पूरी की लेकिन गलत उद्देश्य पर दंडित किया।