धन की अपेक्षा धर्म श्रेष्ठ है
भागवत कथा में तरुण महाराज ने कहा
गंजबासौदा| धनकी अपेक्षा धर्म श्रेष्ठ है। धन इस लोक में कुछ सुख देता है और कभी- कभी दु:ख भी देता है। किन्तु धर्म तो जीवन और परलोक दोनों को उजागर करता है। धर्म मृत्यु के बाद भी साथ आता है। धर्म ही मानव की हर पल रक्षा करता है। उक्तउद् गार ग्राममूड़रा मेवली में चल रही भागवतकथा के दूसरे दिन पंडित तरुण महाराज ने व्यक्त किए।
महाभारत की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा िक कौरव- पांडवों में पांडवों की विजय इसलिए हुई कि वे सभी भगवान के शरणागत थे।
उनका हर आचरण व्यवहार धर्ममय था, धर्म यदि परम धर्म बन जाए तो मानव जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो जाए। धर्म हम श्रद्धा विश्वास से ही करें दिखाने के रूप में करें। नहीं तो उसका कोई फल हमको प्राप्त नहीं होता है। अंत में कथा के यजमान कैलाश रघुवंशी ने आरती उतारी।